यूथ ओलंपिक स्वर्ण पदक के लिए दादी की मौत हो जाने पर भी आइजोल (मिजोरम) नहीं जाने वाले वेटलिफ्टर जेरमी लालरिनुनगा को आखिरकार अपने घर जाना नसीब हो सकेगा। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम में शामिल जेरमी ने साई से गुहार लगाई है कि उनके आइजोल स्थित घर में अत्याधुनिक प्लेटफार्म और वेटलिफ्टिंग सेट उपलब्ध करा दिया जाए जिससे वह घर जाएं तो उनकी तैयारियां किसी तरह से बाधित नही हों।
साई की ओर से उनका यह प्रस्ताव मंजूर हो जाने की उम्मीद है। इससे पहले मीराबाई चानू के मणिपुर स्थित घर में भी उनकी प्रार्थना पर प्लेटफार्म और वेटलिफंर्टग सेट उपलब्ध कराया गया है। पहले यूथ ओलंपिक और अब ओलंपिक क्वालिफायर एशियाई चैंपियनशिप की तैयारियों के लिए जेरमी को घर नहीं भेजा गया। उन्हें घर गए हुए तकरीबन दो साल होने वाले हैं।
जेरमी को टोकियो और पेरिस ओलंपिक में पदक का दावेदार माना जा रहा है। अब इंडियन वेटलिफंर्टग फेडरेशन को लगता है कि ओलंपिक की तैयारियों के लिए जेरमी का कुछ दिनों के लिए घर जाना जरूरी है। उनका ट्रेनिंग में एक जैसा रुझान बना रहे और वह इससे भागे नहीं इसी को ध्यान में रखते हुए 18 से 28 अप्रैल से निंगबो (चीन) में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के बाद उन्हें उनके घर भेजने का फैसला लिया गया है।
जेरमी इस चैंपियनशिप में 67 किलो भार वर्ग में खेलेंगे। फेडरेशन और कोच विजय शर्मा का मानना है कि जेरमी को तैयारियों से दूर नहीं रखा जा सकता है। अगर वह आइजोल कुछ दिनों के लिए भी जाते हैं तो उनकी तैयारियों पर असर पड़ेगा।
यही कारण है कि फेडरेशन की सहमति के बाद जेरमी ने अपने घर पर साढ़े छह लाख रुपये की लागत से प्लेटफार्म और वेटलिफंर्टग सेट लगाने की प्रार्थना की है।मीराबाई पर किया गया यह प्रयोग काम आया है। गांव प्रधान ने मीराबाई केलिए जमीन दी जिस पर साई ने वेटलिफंर्टग प्लेटफार्म लगवाया। वहां गांव की अन्य लड़कियां भी प्रैक्टिस करती हैं।