कुश्ती संघ का मानना है कि शाको अगर रेफरी के फैसले को चुनौती नहीं देते तो विरोधी पहलवान को एक पेनाल्टी अंक का फायदा नहीं मिलता। खुद बृजभूषण ने स्टैंड से कोच को चुनौती नहीं देने का इशारा किया था। तब बजरंग 9-8 से जीत सकते थे। वहीं बजरंग मानते हैं कि कोच ने फैसले को ठीक चुनौती दी थी। उन्होंने भी रेफरी से उनके खिलाफ दिए गए चार अंक पर रीव्यू लेने को कहा था। कजाख पहलवान की ओर से मारी गई अंगुलियों से आई चोट के निशान बजरंग की आंख के पास और कंधे पर साफ देखे जा सकते हैं। हालांकि बृजभूषण मामले को यूडब्लडब्लू अध्यक्ष नेनाद लालोविच के पास ले गए। उनकी ओर से कराई जांच के बाद कुश्ती संघ से यूडब्लूडब्लू ने माफी मांगी, लेकिन रेफरी के चार अंक देने के फैसले को जायज ठहराया। यूडब्लूडब्लू ने यह जरूर माना कि बजरंग को कॉशन के दो अंक नहीं दिए गए।
कुश्ती संघ ने शाको से यह भी पूछा कि बजरंग को भारंदाज, फीतले जैसे दांव पर अभी भी काम करना है। उन्होंने इन दांव पर बजरंग को काम क्यों नहीं कराया है। शाको ने इन बातों पर कुश्ती संघ को जवाब दिया कि वह ओलंपिक में बजरंग को गोल्ड दिलाकर इन सभी खामियों की पूर्ति करेंगे।