भारतीय संघ का कहना है कि अगर रिपोर्ट पहले ही आ गई थी तो प्रतिबंध लगाने की जिम्मेदारी आईडब्लूएफ की बनती है। उसे तत्काल संजीता को प्रतिबंधित कर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया बल्कि संजीता को गोल्ड कोस्ट में खेलने की मंजूरी खुद आईडब्लूएफ ने रैंकिंग जारी कर दी।
भारतीय संघ का कहना है कि संजीता अगर पहले प्रतिबंधित कर दी जातीं तो उन्हें गोल्ड कोस्ट में खेलने से रोका जा सकता था। अब आईडब्लूएफ ने खुद ही जानकारी मांगी है कि 18 नवंबर को डोप सैंपल होने के बाद संजीता कौन से अंतरराष्ट्रीय कंपटीशनों में खेली हैं। यही कारण है कि भारतीय संघ इस मामले को संदेह की निगाह से देखते हुए संजीता के लिए पूरी तरह से लड़ाई लड़ने जा रहा है।