ओलंपिक की तैयारियों के लिए नामी पहलवानों को निजी कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे विदेशी कोच और उनके तैयारी कार्यक्रम ने भारतीय कुश्ती संघ को अनोखा कदम उठाने को मजबूर कर दिया है।
अब कुश्ती संघ नेशनल कैंप के लिए विदेशी कोच अनुबंधित करने केबाद ओलंपिक पदक के दावेदार पहलवानों को अपने स्तर पर निजी विदेशी कोच उपलब्ध कराएगा। इन विदेशी कोच को अनुबंधित करने के लिए खेल मंत्रालय का नहीं बल्कि प्रायोजकों का सहारा लिया जाएगा। खिलाडिय़ों को निजी विदेशी कोच उपलब्ध कराने का कदम उठाने वाली कुश्ती संघ देश का पहला खेल संघ बनने जा रहा है।
पहलवानों के निजी तैयारी कार्यक्रम बन रहे परेशानी
बजरंग, विनेश, साक्षी मलिक, पूजा ढांढा जैसे ओलंपिक पदक के दावेदार पहलवानों को निजी कंपनियों ने अपने साथ जोड़ रखा है। इन पहलवानों को उनकी ओर से निजी विदेशी कोच भी दे रखे गए हैं। इनमें से कुछ पहलवानों ने निजी विदेशी कोच को नेशनल कैंप में ट्रेनिंग कराने की अनुमति मांग रखी है, जिसे कुश्ती संघ ने मंजूर कर लिया। लेकिन कुछ कंपनियों ने इन पहलवानों का विदेश में निजी ट्रेनिंग कार्यक्रम भी तैयार कर लिया।
इस पर मंत्रालय समेत कुश्ती संघ को आपत्ति थी। दोनों का मानना है कि जब नेशनल कैंप के लिए मंत्रालय की ओर से विदेशी कोच अनुबंधित किया जा चुका है तो निजी तैयारी कार्यक्रम को कैसे संचालित किया जा सकता है? कुश्ती संघ ने इन पहलवानों के इस कार्यक्रम को मंजूरी नहीं दी और उन्हें संघ की ओर से चुने गए बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलने को कहा। हालांकि इस वक्त बजरंग निजी कार्यक्रम पर जर्मन लीग में खेल रहे हैं।
तैयारियों में पारदर्शिता लाने को उठाया कदम
कुश्ती संघ का मानना है कि उसकी ओर से पहलवानों को निजी विदेशी कोच उपलब्ध कराने से ओलंपिक की तैयारियों में पारिदर्शिता बनी रहेगी। उसे पहलवान की हर गतिविधि के बारे में पता होगा। संघ ने यह भी साफ किया है कि जिस निजी विदेशी कोच के संरक्षण में इस वक्त पहलवान ट्रेनिंग कर रहे हैं अगर वह चाहते हैं तो उन्हें भी अनुबंधित किया जा सकता है। हाल ही में कुश्ती संघ ने तीन विदेशी कोच महिलाओं के लिए एंड्र्यु कुक, फ्रीस्टाइल के लिए हुसैन करीमी और ग्रीको रोमन के लिए टीमो काजराशविली को अनुबंधित किया है।