यह भारतीय पहलवान जानती है कि बड़ा पदक जीतने का मतलब क्या होता है। वह रियो ओलंपिक से पहले लगी चोट को भूली नहीं है जिसके कारण उसे कुछ हफ्तों तक व्हीलचेयर पर रहना पड़ा था। उन्होंने कहा, ‘मेरी मां ने तो मेरी बाउट देखना ही बंद कर दिया था। उसे डर लगता था कि मैं फिर से अपने पैर में चोट लगा लूंगी।
हालांकि वह अगर देखती भी तो वह चिल्ला चिल्लाकर दूसरों के लिए मुश्किल पैदा कर देती कि अरे, मेरी बेटी की टांग छोड़ दे, तोड़ ना दियो।’ अपने पहलवान पति सोमबीर राठी के बारे में उन्होंने कहा, ‘उन्होंने भले ही पदक नहीं जीते हों लेकिन कुश्ती के दांव पेच में वह बहुत चतुर हैं। वह भी वही चीज कहते जो मेरे विदेशी कोच ने कही थी।’