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झुंझलाहट में हाथ मलते रह गए बजरंग पूनिया, विवादित हार और टूट गई भारत की स्वर्णिम उम्मीद

Fri, 20 Sep 2019 01:52 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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बजरंग पूनिया - फोटो : पीटीआई
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विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2019 में गुरुवार को भारत की सबसे बड़ी उम्मीद खत्म हो गई। देश के स्टार पहलवान और गत उपविजेता बजरंग पूनिया को सेमीफाइनल में एक नजदीकी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।

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पूनिया ने जिस अंदाज में अपने विश्व चैंपियनशिप अभियान की शुरुआत की थी, उसे देखकर कोई भी यही कहता कि यह हरियाणवी छोरा इस बार विश्व विजेता बनकर ही मानेगा, लेकिन शायद किस्मत बजरंग से रूठी हुई थी।

कजाकिस्तान के नूर-सुल्तान में बजरंग जब अपना सेमीफाइनल मुकाबला खेलने उतरे तो वह फेवरेट नजर आ रहे थे, लेकिन स्थानीय दर्शकों के बीच खेल रहे नियाजबेकोव का भाग्य सितारा चमका हुआ था, तभी तो छह मिनट तक चला तनावपूर्ण मुकाबला 9-9 से बराबरी पर छूटा। मगर नियाजबेकोव ने मुकाबले के दौरान एक बार में सर्वाधिक चार अंक बनाए थे इसलिए उन्हें विजेता घोषित किया गया। 
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इस विवादास्पद मुकाबले में नियाजबेकोव काफी थक गए थे, लेकिन रेफरी ने उन्हें उबरने का पूरा मौका दिया। इसके अलावा कम से कम तीन अवसरों पर उन्हें चेतावनी नहीं दी गई। इसके बजाय स्थानीय पहलवान को चार अंक दे दिए गए जबकि सर्किल के किनारे पर अपने प्रतिद्वंद्वी पर हावी होने के लिए ये अंक बजरंग को मिलने चाहिए थे।

बजरंग की इस सनसनीखेज हार के बाद उनके गुरू और भारत के धुरंधर पहलवान योगेश्वर दत्त भड़क उठे। सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए 2014 कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट योगेश्वर ने कजाकिस्तान के ऑफिशियल्स पर पक्षपात और धोखाधड़ी का आरोप लगाया।
 

खुद बजरंग ने भी कई अवसरों पर अपनी निराशा भी दिखाई, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं मिला। खैर इन सब के बीच बजरंग और भारत के लिए अच्छी बात यह रही कि इस पहलवान ने क्वार्टरफाइनल मैच में जीत के साथ ही टोक्यो ओलंपिक 2020 का टिकट भी कटवा लिया। अब पिछली बार के रजत पदक विजेता भारतीय को शुक्रवार को कांस्य पदक के लिए शुक्रवार को भिड़ना होगा। 

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