सचिन ने 10.30 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ सोना अपने नाम किया। उन्होंने 16.21 मीटर का अपना ही रिकॉर्ड बेहतर किया जो उन्होंने पिछले साल पेरिस में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बनाया था। पैरा एथलेटिक्स स्पर्धाओं में एफ46 श्रेणी उन लोगों के लिए है जिनकी एक या दोनों भुजाओं की गतिविधि मामूली रूप से प्रभावित है या जिनके हाथ-पैर नहीं हैं। इन एथलीटों को कूल्हों और पैरों की ताकत से थ्रो करना होता है।
महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले सचिन स्कूली दिनों में एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे जिससे उन्होंने कोहनी की मांसपेशियां गंवा दी थीं। कई सर्जरी के बावजूद वह ठीक नहीं हो सके। सचिन ने स्वर्ण जीतने के बाद कहा- मैं इसकी ही उम्मीद कर रहा था और मैं बहुत खुश हूं। मैं पेरिस पैरालंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुका हूं और वहां भी स्वर्ण जीतने की कोशिश करूंगा।
अभी टूर्नामेंट के तीन दिन बाकी है और कोच सत्यनारायण को पदक संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा- हमें दो और स्वर्ण की उम्मीद है। पदकों की संख्या 17 तक जानी चाहिए। इससे पहले कल पैरालंपिक चैंपियन सुमित अंतिल ने एफ64 भालाफेंक में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखा था। थंगावेलु मरियप्पन और एकता भयान ने भी स्वर्ण पदक जीते थे।