किसी भी पिता के लिए बेटे की सफलता से बड़ी खुशी और नहीं होती है। पहलवान रवि कुमार जब नूर सुल्तान में टोकियो ओलंपिक का टिकट हासिल करने के लिए मैट पर जद्दोजहद कर रहे थे तो वहीं उनका पिता राकेश दहिया सोनीपत जिले में पड़ते नाहरी गांव में अपने और बटाई पर लिए खेतों में धान बीजने के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे थे।
पानी नहीं बरसने के चलते राकेश अब तक खेतों में धान नहीं बीज पाए हैं। खेतों में पानी डालने के लिए ट्यूबवेल में डीजल डालने को जमकर पैसा बहाना पड़ रहा है। फिर भी पानी की जरूरत पूरी नहीं हो रही है। इसी दौरान राकेश को फोन पर बताया गया कि बेटे रवि ने ओलंपिक का टिकट हासिल कर लिया है।
राकेश अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि उस वक्त खुशी काफी हुई कि बेटे को ओलंपिक टिकट मिल गया है, लेकिन सच्चाई यह है कि इस चिंता से नहीं उबर पा रहा हूं कि खेतों में धान कैसे बीज पाऊंगा। धान की फसल नहीं लगी तो काफी नुकसान होगा।
रवि कुमार ने ट्रायल के दौरान
अमर उजाला से कहा था कि उनके पिता ने कर्ज लेकर उन्हें पहलवानी कराई, लेकिन बीएसएफ में नौकरी करने वाले चाचा ने काफी मदद की। राकेश बताते हैं कि आर्थिक हालात ज्यादा ठीक नहीं होने के चलते हमेशा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जब से रवि छत्रसाल अखाड़े में गया है तब से बेटे की पहलवानी की चिंता खत्म हो गई। उसे दूध-दही-मक्खन भेजता रहता हूं।
दरअसल यह पहलवान सुशील कुमार की कृपा रही कि उन्होंने कुछ साल पहले रवि की एक संस्था से मदद करा दी। वह और रवि सुशील के बहुत आभारी हैं। राकेश के मुताबिक घर पर खेती है, लेकिन उससे गुजारा नहीं चलता है जिसके चलते उन्हें दूसरे के खेतों को बटाई पर लेना पड़ता है।
इसी तरह वह गुजारा चलाते हैं लेकिन रवि को इसका आभास नहीं होने देते हैं। उम्मीद है कि बेटा विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतेगा। खास बात यह है कि अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में रजत जीतने वाले रवि का यह दूसरा सीनियर स्तर का अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है।