देश में 2000 के दौर में लॉन टेनिस में बेहतरीन खेल दिखाकर सानिया मिर्जा ने दुनिया को भारतीय महिलाओं के दम से परिचित कराया। सानिया ने देश में इस खेल को लेकर महिलाओं में उम्मीद जगाई। यह वह दौर था जब देश में महिला टेनिस का मतलब सिर्फ सानिया था। सानिया को उनकी खेल क्षमता की वजह से 2006 में पद्मश्री दिया गया। यह सम्मान पाने वाली वह देश की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनीं।
छह वर्ष से टेनिस का सफर हुआ शुरू
सानिया मिर्जा
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छह वर्ष से टेनिस का सफर शुरू हुआ। 1999 में पहली बार जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। टेनिस का ककहरा सानिया को महेश भूपति के पिता सीके भूपति ने सिखाया। अमेरिका में भी टेनिस सीखा। उनकी टेनिस का असर था कि 2002 के दौर में देश के शीर्ष टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने बुसान एशियाड में 16 साल की सानिया को खेलते देखा और कहा कि वह सानिया के साथ ही डबल्स में खेलेंगे। दोनों ने देश को कांस्य पदक भी दिलाया। सानिया ने 17 साल की उम्र में विंबलडन का जूनियर डबल्स चैंपियनशिप का खिताब जीता।
मां-पिता सानिया को स्टेफी ग्राफ बनाना चाहते थे
सानिया मिर्जा
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मां-पिता ने बेटी के टेनिस प्रेम को देखते हुए सानिया को स्टेफी ग्राफ बनाना चाहते थे। सानिया को वैसे भी स्टेफी ग्राफ काफी पसंद थी। उनके लिए इससे और खुशी क्या हो सकती थी। मां ने सानिया को काफी सहारा दिया। उन्हें मानसिक रूप से मजबूती दी। हैदराबाद की सानिया मिर्जा ने जनवरी 2005 में भारतीय टेनिस के इतिहास में एक नया इतिहास लिखा। ऑस्ट्रेलियन ओपन में हंगरी की 84 वीं वरीयता प्राप्त पेत्रा मैंडुला को हराने के साथ ही ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के तीसरे राउंड में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं। सानिया की इस वक्त वरीयता 34 वीं थी।
भारतीय महिला टेनिस का यह गौरवमयी क्षण था। चौथे दौर में सानिया का मुकाबला दबंग सेरेना विलियम्स से था। सानिया सेरेना से मैच हार गईं लेकिन उनके खेल कौशल को मीडिया ने काफी सराहा। वर्ष 2005 में यूएस ओपन में चौथे राउंड में प्रवेश किया। चौथे राउंड में सानिया मारिया शारापोवा से हार गई, परंतु इस स्थान तक पहुंचने वाली वह प्रथम भारतीय महिला खिलाड़ी थी।
सचिन के बाद देश में सानिया का नाम था
सानिया मिर्जा और शोएब मलिक
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सानिया ने 2006 में दोहा एशियाड में लिएंडर पेस के साथ मिश्रित युगल का स्वर्ण पदक जीता। महिलाओं के एकल मुकाबले में रजत पदक जीता। सानिया की लोकप्रियता काफी बढ़ गई। लोगों ने उन्हें सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरा सर्वाधिक लोकप्रिय खिलाड़ी का दर्जा दे दिया। अगस्त 2007 में उनकी रैंकिंग एकल में 27 थी जो उनकी सर्वाधिक रैंकिंग थी। लिएंडर पेस 73 रैंकिंग से आगे नहीं बढ़ पाए थे।