कोरोना वायरस के चलते टोक्यो ओलंपिक को टालने के लिए बहस छिड़ गई। इस बीच कनाडा ने अपने खिलाड़ियों को भेजने से मना कर दिया। कोरोना के खतरे को देखते हुए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने कहा है कि कनाडा के निर्णय से हम अवगत हैं। ऑस्ट्रेलिया ने भी सवाल उठाए हैं। फिलाहल अभी हमने कोई फैसला नहीं किया है कि भारत को भी टोक्यो ओलंपिक से बाहर हो जाना चाहिए या नहीं। आईओसी के सचिव राजीव मेहता ने कहा कि अभी हम सरकार के साथ मिलतर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आज खेल मंत्री और खेल सचिव से इस बारे में बातचीत होगी। मालूम हो कि कनाडा टोक्यो ओलंपिक से बाहर हटने वाला पहला देश है।
आईओसी पर 24 जुलाई से नौ अगस्त तक होने वाले खेलों को स्थगित करने का खेल महासंघों की ओर से काफी दबाव है। आईओसी अध्यक्ष थामस बाक ने कहा कि इस पर फैसला चार सप्ताह के भीतर लिया जाएगा । उन्होंने खिलाड़ियों को एक खुले खत में लिखा कि इंसान सबसे ऊपर है,खेलों के आयोजन से भी।
उन्होंने कहा कि हमने पहले भी संकेत दिए हैं कि हम अलग अलग विकल्पों पर विचार कर रहे हैं । टोक्यो ओलंपिक 2020 की अंतिम तिथि तय करना अभी भी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि आईओसी संबंधित पक्षों और स्वास्थ्य विभाग से संपर्कमें है ।
बाक ने कहा कि हमें यकीन है कि अगले चार सप्ताह में कोई हल निकल आएगा। खेलों को रद्द करना किसी समस्या का समाधान नहीं है और इससे किसी का भला नहीं होगा लिहाजा यह हमारे एजेंडे में नहीं है।
इससे पहले अमेरिका और फ्रांस के तैराकी महासंघ, अमेरिका और स्पेन के एथलेटिक्स महासंघ, नार्वे ओलंपिक समिति, फ्रांस एथलेटिक्स और जाने माने मौजूदा और पूर्व खिलाड़ी कह चुके हैं कि इन हालात में ओलंपिक नहीं होने चाहिए।
आईओसी अब तक लगातार कहती आई है कि खेल 24 जुलाई से शुरू होंगे हालांकि कोविड 19 के चलते दुनिया भर में टूर्नामेंट रद्द हो गए हैं । चारों ओर से हो रही निंदा के बाद आईओसी ने आखिरकार स्वीकार किया कि ओलंपिक स्थगित करने की संभावना पर विचार हो सकता है। ब्राजील और स्लोवेनिया की ओलंपिक समिति ने भी कहा है कि इन हालात में वे अपने खिलाड़ियों को ओलंपिक के लिए नही भेज सकते ।