एशियाई चैम्पियन पूनिया ने ट्वीट किया, 'जब खिलाड़ियों को आप पुरस्कार का वादा करते हैं तब उन खिलाड़ियों को आप पैसे का लालच नहीं बल्कि खिलाड़ियों का साथ देने का वादा करते हैं। अगर आप अपने वादे को पूरा नहीं कर सकते तो फिर भविष्य मे कोई भी खिलाड़ी आपसे किस बात की उम्मीद रखें! '
उन्होंने लिखा, 'हरियाणा के युवाओं ने देश को कई बेहतरीन पदक दिए हैं। भले ही एक छोटा सा राज्य है हरियाणा, पर यहां के खिलाड़ियों ने पूरे देश को कई बार गौरवान्वित किया है। उनको मिलने वाली राशि में कटौती करके उनके मनोबल को न तोड़ा जाए। मेरी हरियाणा सरकार से विनती है कि इस निर्णय पर दोबारा विचार करें। '
वर्ष 2018 एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता विनेश ने ट्वीट किया, 'मेरी हरियाणा सरकार से गुजारिश है कि आप अपनी दी हुई धन राशि को वापस ले लें। इस तरह खिलाड़ियों को आप अपने राजनीतिक अखाड़े पर खड़ा करके उन्हें अपमानित न करें। '
उन्होंने कहा, 'एक तरफ तो हमारे देश के प्रधानमंत्री जी कहते हैं खेल आगे बढ़ेगा तभी देश आगे बढ़ेगा और एक हमारी हरियाणा की सरकार है जो खेलों में राजनीति करके उनको पूरी तरह ख़त्म करने की कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। क्या ऐसे ही देश आगे बढ़ेगा??'
वर्ष 2012 ओलंपिक कांस्य पदक विजेता योगेश्वर ने ट्वीट किया, 'खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि में कटौती करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। पुरस्कार राशि में कटौती करने का कारण खिलाड़ियों को बताओ। खिलाड़ी हरियाणा व देश का मान बढ़ाते हैं। उनका मनोबल बढ़ाओ जिसे वो आने वाले ओलम्पिक देश के लिए ज़्यादा से ज़्यादा पदक जीत सकें।'
पुरस्कार राशि में कटौती के आरोपों पर विज ने कहा, 'हरियाणा अपने खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा पुरस्कार राशि देती है। इसमें कोई कटौती नहीं की गयी। हमने खिलाड़ियों को जो सम्मान पत्र दिया है, उसमें जिक्र किया है कि अगर कोई भेदभाव होता है तो वे हमारे विभाग से इसे स्पष्ट कर सकते हैं। '