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अनदेखी: व्हील चेयर पर पड़े जिम्नास्ट संदीप को खेलो इंडिया से बाहर निकाला

Wed, 16 Sep 2020 05:20 AM IST
योगेश साहू स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

  • जनवरी में पदक जीता फरवरी में रीढ़ की हड्डी टूटी पूरे इलाज की बजाय अच्छा प्रदर्शन नहीं बताकर खेलो इंडिया से निकाला 
  • इलाहबाद के जिम्नास्ट संदीप ने अब खेल मंत्री से इलाज के लिए मांगी आर्थिक मदद
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किरण रिजिजू
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विस्तार
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इलाहबाद का संदीप सात माह पहले तक 2024 और 2028 के ओलंपिक पदक दावेदार के रूप में साई के इंदिरा गांधी स्टेडियम में चल रहे राष्ट्रीय सेंटर ऑफ एक्सिलेंस (एनसीओई) में तैयारी कर रहा था। जनवरी में उसने गुवहाटी में हुए अंडर-21 खेलो इंडिया खेलों में रिंग में रजत पदक जीता। पांच फरवरी को आईजी स्टेडियम में फ्लोर एक्सरसाइज के दौरान समरसाल्ट पर उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई।

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कई माह वह इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में इलाज कराता रहा।  शुरुआत में संदीप का साई ने साथ दिया, लेकिन जब उसे बड़े सहारे की जरूरत थी तो साई ने उससे मुंह फेर लिया। कोरोना के चलते वापस इलाहबाद लौट गए संदीप को खेलो इंडिया स्कीम से यह कहकर निकाला गया कि वह अपने प्रदर्शन पर खरे नहीं उतरे हैं, जिसके चलते खेलो इंडिया स्कीम के तहत दी जा रही  सुविधाएं, भत्ता बंद किया जाता है।

कम से कम पैरों पर तो खड़ा होने देते
संदीप ने खेल मंत्री किरन रिजीजू से गुहार लगाई है कि उन्हें इलाहबाद में इलाज के लिए पैसों की जरूरत है। उनकी मदद की जाए। संदीप को खेलो इंडिया स्कीम में 2018 दिल्ली में हुए अंडर-17 खेलो इंडिया खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर शामिल किया गया था।
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संदीप का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम है कि वह वापस जिम्नास्टिक कर पाएंगे या नहीं, लेकिन उन्हें कम से कम पैरों पर तो खड़ा होने दिया जाता। उन्हें दुख इस बात का है कि 23 जुलाई को साई ने उन्हें जो पत्र भेजा है उसमें उन्हें निकाले जाने की वजह खराब प्रदर्शन बताया गया है। 

शुरुआत में की साई ने मदद
संदीप का कहना है कि साई ने शुरूआत में उनके इलाज पर साढ़े 16 लाख रुपये खर्च किए,लेकिन उन्हें फीजियोथेरपी, रिहैबलिटेशन के लिए और पैसों की जरूरत है जो उनके पास नहीं हैं। उनके पिता सेना में हैं और उनके पास नहीं हैं। मां घर में हैं लेकिन बीमार रहती हैं। यही वजह है कि उन्होंने खेल मंत्री से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।

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