पहाड़ से नीचे खाई में गिरी कार में जितने सवार थे उनमें सिर्फ कटरा (जम्मू) के राकेश कुमार जीवित बचे। लेकिन उनकी टांग जाती रही। 2009 से 2017 तक उनकी जिंदगी बोझ बनकर व्हील चेयर पर गुजर रही थी। दुकान के बाहर राकेश को वहां से गुजरने वाले कोच कुलदीप वेदवान ने देखा एक दिन उन्होंने राकेश को तीरंदाजी खेलने की सलाह दे डाली। राकेश ने हामी भर दी। लेकिन घर से कटरा की माता वैष्णो देवी अकादमी जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते थे। माता-पिता, बहन ने कई दिनों तक मदद की, लेकिन पूरे घर पर आर्थिक तंगी का साया था। हार कर राकेश ने उसे ऑटो वाले से ही डेढ़ लाख रुपये का लोन ले लिया जो उन्हें अकादमी छोडने जाता था। राकेश की मेहनत रंग लाई और एक साल के अंदर वह अंतरराष्ट्रीय कंपटीशन में स्वर्ण ले आए। वही राकेश सोमवार को बिना एस्कार्ट के टोक्यो रवाना हुए है। यही नहीं पांच सदस्यीय टीम के साथ दो कोच जाने थे, लेकिन विवादों के चलते सिर्फ कुलदीप गए हैं।