भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा शनिवार को टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। एथलेटिक्स में भारत का यह पहला मेडल है। इस गोल्ड के साथ नीरज ने 'फ्लाइंग सिख' का सपना साकार किया। कामयाबी की नई इबारत लिखने वाले नीरज ने अपने गोल्ड मेडल को भारत के महान धावक दिवंगत मिल्खा सिंह को समर्पित किया। गोल्ड जीतने के बाद नीरज ने कहा, 'मैं अपने गोल्ड मेडल को महान धावक मिल्खा सिंह को समर्पित करता हूं। वे शायद मुझे स्वर्ग से देख रहे होंगे। मैं पदक के साथ मिल्खा सिंह से मिलना चाहता था। विश्वास नहीं हो रहा। पहली बार है जब भारत ने एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीता है इसलिए मैं बहुत खुश हूं। हमारे पास अन्य खेलों में ओलंपिक का एक ही गोल्ड है।'
एशियाई खेलों में चार स्वर्ण पदक और कॉमनवेल्थ गेम्स में एक गोल्ड मेडल जीतने वाले मिल्खा सिंह की रफ्तार की दीवानी दुनिया थी। फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर इस धावक को दुनिया के हर कोने से प्यार और समर्थन मिला। मिल्खा का जन्म अविभाजित भारत (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था, लेकिन वह आजादी के बाद हिंदुस्तान आ गए थे। मिल्खा की प्रतिभा और रफ्तार का यह जलवा था कि उन्हें पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने उन्हें 'फ्लाइंग सिख' की उपाधि से नवाजा था। इसके बाद से मिल्खा सिंह को पूरी दुनिया में 'फ्लाइंग सिख' के नाम से जाना जाने लगा।