गोल्ड मेडल्स में 6 ग्राम से ज्यादा सोने का इस्तेमाल किया गया है। गोल्ड मेडल बनाने में प्योर सिल्वर पर गोल्ड प्लैटिंग की गई है। वहीं, सिल्वर मेडल्स, शुद्ध चांदी के बने हैं। ब्रॉन्ज मेडल बनाने में 95 फीसदी तांबे और 5 फीसदी जिंक का इस्तेमाल किया गया है। इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी (IOC) के रेगुलेशंस के मुताबिक, मेडल्स में 5 रिंग्स सिंबल, गेम का ऑफिशियल नाम और पैनाथिनियाक स्टेडियम के सामने यूनान में जीत की देवी नाइक का पिक्चर होना जरूरी है।
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, जब ओलिंपिक मेडल्स में रिसाइकल्ड मेटल्स का इस्तेमाल किया गया है। रियो में हुए ओलिंपिक में भी रिसाइकल्ड मेटल्स से मेडल्स बनाए गए थे। हालांकि, इस ओलंपिक में 30 फीसदी से कम गोल्ड और सिल्वर मेडल बनाने में रिसाइकल मेटल का इस्तेमाल किया गया था। टोक्यो ओलंपिक में सभी मेडल्स रिसाइकल्ड मेटल्स से ही बनाए गए हैं। आपको बता दें कि टोक्यो ओलंपिक 24 जुलाई 2020 से शुरू होंगे और 9 अगस्त 2020 को खत्म होंगे।