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62 लाख मोबाइल फोन और हजारों टन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से बने टोक्यो ओलंपिक 2020 के मेडल्स

Thu, 25 Jul 2019 04:51 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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टोक्यो ओलंपिक मेडल - फोटो : सोशल मीडिया
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टोक्यो ओलंपिक की ऑर्गेनाइजिंग कमिटी ने अप्रैल 2017 में पुराने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस देने के लिए एक कैंपेन लॉन्च किया था। इस कैंपेन में कमिटी को 78,895 टन पुराने गैजेट्स मिले, जिसमें 62.1 लाख मोबाइल फोन भी शामिल थे। इन पुराने गैजेट्स से 32 किलो सोना, 3,500 किलो चांदी और 2,200 किलो तांबा निकाला गया।

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अब इन्हीं पुराने गैजेट्स (मोबाइल, टैबलेट्स) से निकाली गई मेटल्स से टोक्यो ओलिंपिक के मेडल्स बने हैं। एक साल पहले गेम्स की ऑर्गेनाइजिंग कमिटी ने ओलंपिक मेडल्स के डिजाइन का खुलासा किया है। इन मेडल्स को जुनुची कावानिसी ने डिजाइन किया है। कावानिसी को 400 से ज्यादा प्रोफेशनल्स डिजाइनर्स और डिजाइन स्टूडेंट्स में से चुना गया है।

छह ग्राम से ज्यादा सोने का इस्तेमाल

टोक्यो ओलंपिक मेडल - फोटो : सोशल मीडिया
गोल्ड मेडल्स में 6 ग्राम से ज्यादा सोने का इस्तेमाल किया गया है। गोल्ड मेडल बनाने में प्योर सिल्वर पर गोल्ड प्लैटिंग की गई है। वहीं, सिल्वर मेडल्स, शुद्ध चांदी के बने हैं। ब्रॉन्ज मेडल बनाने में 95 फीसदी तांबे और 5 फीसदी जिंक का इस्तेमाल किया गया है। इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी (IOC) के रेगुलेशंस के मुताबिक, मेडल्स में 5 रिंग्स सिंबल, गेम का ऑफिशियल नाम और पैनाथिनियाक स्टेडियम के सामने यूनान में जीत की देवी नाइक का पिक्चर होना जरूरी है।
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रियो ओलंपिक में भी हो चुका है यह प्रयोग

रियो ओलंपिक - फोटो : Rio 2016
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, जब ओलिंपिक मेडल्स में रिसाइकल्ड मेटल्स का इस्तेमाल किया गया है। रियो में हुए ओलिंपिक में भी रिसाइकल्ड मेटल्स से मेडल्स बनाए गए थे। हालांकि, इस ओलंपिक में 30 फीसदी से कम गोल्ड और सिल्वर मेडल बनाने में रिसाइकल मेटल का इस्तेमाल किया गया था। टोक्यो ओलंपिक में सभी मेडल्स रिसाइकल्ड मेटल्स से ही बनाए गए हैं। आपको बता दें कि टोक्यो ओलंपिक 24 जुलाई 2020 से शुरू होंगे और 9 अगस्त 2020 को खत्म होंगे।
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