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पहला पदक जीतने में 35 साल तो फाइनल में पहुंचने में लगे 45 साल, पंघाल ने रचा इतिहास

Sat, 21 Sep 2019 09:58 AM IST
Rohit Ojha स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अमित पंघाल (फाइल फोटो)
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विश्व चैंपियनशिप 1974 में शुरू हुई और भारत को अपना पहला पदक जीतने में 35 साल लगे तो फाइनल में पहुंचने को 45 साल। हरियाणा के विजेंदर ने 2009 में कांसा जीतकर यह इंतजार खत्म किया, तो अब उन्हीं के राज्य के पंघाल ने उनसे एक कदम आगे जाकर नया इतिहास रच दिया। अमित के  इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद अब एक बार फिर भारतीय पुरुष मुक्केबाजी की भी तस्वीर बदलेगी।

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अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक खेलों में अमित भारतीय पदक की सबसे बड़ी उम्मीद होंगे। विजेंदर ने दस साल पहले 2009 में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर जो शुरुआत की थी अब पंघाल ने फाइनल में पहुंच उसे नई उड़ान दी है। पंघाल अगर शनिवार को विश्व चैंपियन बन जाते हैं तो यह भारतीय पुरुष मुक्केबाजी में मील का पत्थर साबित होगा।

18 साल में महिलाओं ने जीते 32 पदक
भारतीय महिलाओं ने 18 साल में नौ स्वर्ण, सात रजत और 16 सहित 32 पदक जीत लिए तो पुरुषों के खाते में सिर्फ छह ही आ पाए। इनमें से छह पीले तमगे अकेले रिंग की क्वीन एमसी मैरीकॉम ने जीते। उन्होंने छह बार विश्व चैंपियन बनकर नया कीर्तिमान ही बना डाला। वह विश्व चैंपियनशिप में सात पदक जीतने वाली दुनिया की एकमात्र महिला मुक्केबाज हैं। उनके बाद आयरलैंड की कैटी टेलर (5 स्वर्ण, 1 कांस्य) हैं। पुरुषों में क्यूबा के फेलिस सवोन के भी (6 स्वर्ण, 1 रजत) सात पदक हैं। मैरीकॉम के अलावा एल सरित देवी भी विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण सहित तीन पदक जीते हैं। अगर ओवर आल की बात की जाए तो भारत महिलाएं रूस (54) और चीन (46) के बाद तालिका में तीसरे नंबर पर हैं।

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