घोष के खिलाफ जब यह मामला दर्ज हुआ था तब वह जर्मनी में खेल रहे थे। भारत में गिरफ्तारी से बचने के लिए वह यूरोप के 'तीन-चार अलग अलग देशों' में ही रूके रहे और मई में स्वदेश वापस आए।
उन्होंने कहा, 'इस समय मुझे पता चला कि मेरा शुभचिंतक कौन है। मैं पूरी तरह टूट चुका था। मैं अपने करियर के शीर्ष पर था, जर्मनी में अच्छे क्लब के लिए खेल रहा था और कुछ ऐसा हो गया। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा लेकिन मैं उस समय से आगे निकल चुका हूं। ऐसे दो लोगों और जाहिर हैं मेरे माता-पिता की मदद के बिना संभव नहीं होता।'
मुश्किल वक्त में शरत कमल, जी सथियान, हरमीत देसाई और राष्ट्रीय टीम के दूसरे खिलाड़ी घोष के साथ खड़े दिखे। उन्होंने कहा, 'टीटीआईएफ, खिलाड़ी सब मेरे साथ खड़े थे। सब कुछ गलत हो रहा था लेकिन उनके समर्थन से मैं मजबूत रहा।'