तीन साल बाद मैट पर वापसी करने वाले दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार ने शुक्रवार को राष्ट्रीय चैंपियन बनने में तीन मिनट से कम समय लिया।
राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप के 74 भारवर्ग में 34 वर्षीय स्टार पहलवान को क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल में प्रतिद्वंद्वियों ने वाकओवर दे दिया।
सुशील ने पूरे मुकाबले में कुल दो मिनट 33 सेकंड मैट पर बिताए। उन्हें केवल दो शुरुआती मुकाबले में ही दांव पेंच दिखाने की जरूरत पड़ी।
इस बीच देश की एकमात्र ओलंपिक पदक विजेता महिला रेसलर साक्षी मलिक और दंगल फेम गीता फोगाट अपने-अपने भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं।
सुशील ने शुरुआती दौर के मुकाबलों में अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराने में दो मिनट का समय भी नहीं लिया। उन्होंने दिखाया कि उनके खेल का स्तर क्या है।
सुशील ने पहले मैच में मिजोरम के लालमालसावमा को 48 सेकंड में हरा दिया। अगले मैच में सुशील ने मुकुल मिश्रा को एक मिनट 45 सेकंड में हराया। क्वार्टर फाइनल में उनके प्रतिद्वंद्वी प्रवीण और सेमीफाइनल में सचिन दहिया ने वाकओवर दे दिया था।
फाइनल में उनका मुकाबला प्रवीण राणा से होना था लेकिन प्रवीण ने चोट को वजह बताते हुए वाकओवर दे दिया जिससे सुशील स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे।
राणा का कहना है कि उन्हें चोट है और मुकाबले में उतरने से यह और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि चैंपियनशिप से पहले ही उनकी जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया था।
मैं मेडिकल देना चाहता था लेकिन रेलवे को दो पहलवानों की जरूरत इसलिए मैंने चैंपियनशिप में हिस्सा लिया।
कुश्ती के प्रशिक्षकों और भारतीय कुश्ती संघ के अधिकारियों के अनुसार सचिन दहिया और प्रवीण ने सुशील के सम्मान में वाकओवर देने का फैसला किया।
रियो ओलंपिक में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वालीं साक्षी मलिक ने 62 भारवर्ग के फाइनल में पूजा तोमर को 10-0 से हराया। गीता फोगाट ने 59 भारवर्ग की खिताबी भिड़ंत में रविता को पराजित किया।
गीता के पति पवन कुमार भी 86 भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे। महिलाओं के 68 भारवर्ग में दिव्या काकरान ने मोनिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता।