देश में महानतम ओलंपियन में से एक सुशील कुमार की हत्या के मामले में गिरफ्तारी से देश का खेल जगत निराश और सकते में है। इन घटनाओं से भारतीय खेल जगत स्तब्ध है लेकिन सुशील की उपलब्धियों का सम्मान बरकरार है। सुशील कुश्ती में भारत के एकमात्र विश्व चैंपियन और राष्ट्रमंडल खेलों के तीन बार के स्वर्ण पदक विजेता हैं।
मिश्रित प्रतिक्रिया : जांच से पहले निष्कर्ष नहीं
एक पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि कोई भी नजरिया कायम करने से पहले अधिक जानकारी का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘वह सिर्फ एक आरोपी है। लेकिन एक स्तर पर आने के बाद काफी कुछ इस पर निर्भर करता है कि आपके साथी कौन हैं। यह निराशाजनक है लेकिन अगर वह निर्दोष है जो निश्चित तौर पर उसे न्याय मिलना चाहिए।’
एक पूर्व हॉकी कप्तान ने कहा कि सुशील के दर्जे के हीरो का नीचे गिरना कभी भी खेल के लिए अच्छा नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘अगर आरोप सही है तो यह भारतीय खेलों का सबसे काला अध्याय होगा। वह कई युवा खिलाड़ियों के लिए आदर्श था।’
एक जाने-माने निशानेबाज ने कहा, ‘जहां तक ओलंपियन का सवाल है तो उनसे जुड़ी ऐसी चीजें कभी नहीं सुनी। इस पर विश्वास करना मुश्किल है, अगर असल में ऐसा हुआ है तो यह काफी स्तब्ध करने वाला है। मुझे नहीं पता कि क्या कहा जाए।
लंदन ओलंपिक के बाद से कुश्ती से दूर होते गए सुशील
नौ साल पहले लंदन ओलंपिक के एक्सेल एरीना के बाहर सुशील के गले में रजत पदक था, लेकिन उस वक्त उनकी आंखों में ओलंपिक स्वर्ण की चमक थी। खुद उन्होंने कुछ मीडिया कर्मियों के समक्ष अपनी इस सपने को जाहिर किया, लेकिन लंदन से वतन वापसी के बाद धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लग पड़ा। जिस सुशील की कुश्ती और उसकी मेहनत के बिना कल्पना नहीं की जा सकती है। वही सुशील अब अपनी प्रतिष्ठा के नीचे ऐसे दबने लगे कि टूर्नामेंटों से ही दूरी बनाने लगे। पहले वह टूर्नामेंट खेलने के लिए आतुर रहते थे, लेकिन अचानक से उन्होंने अपनी मर्जी से खेलना शुरू कर दिया। मानों वह खेल से बड़े हो गए हों। यहीं से उनका पतन होना शुरू हो गया और वह लगातार विवादों में रहने लगे।
एक के बाद एक टूर्नामेंट छोड़ते गए सुशील
पहला विवाद तब हुआ जब सुशील ने 2014 के एशियाई खेलों से दूरी बनाई। अंतिम क्षणों तक वह कहते रहे कि इन खेलों में खेलेंगे, लेकिन वह नहीं खेले। हालांकि कंपटीशन के मामले में राष्ट्रीय चैंपियनशिप से भी बदतर राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने जरूर शिरकत की और 2014, 2018 में स्वर्ण भी जीते। टूर्नामेंटों से भागने की वजह यह थी कि सुशील का ध्यान कुश्ती में कम और अन्य आडंबरों में ज्यादा लगने लगा। एक बारगी तो सुशील अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेलने गए और उनका वजन बढ़ा हुआ निकला, जिसके चलते वह डिसक्वालीफाई कर दिए गए। कुश्ती संघ ने उन्हें इस हरकत के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया।
2016 के बाद से लगातार रहे विवादों में
सुशील की रविवार को गिरफ्तारी से पहले उनके जीवन का सबसे बड़ा विवाद 2016 के रियो ओलंपिक से पहले सामने आया। जब नर सिंह यादव ने उन पर डोपिंग में फंसाने का आरोप लगा दिया। यह मामला सीबीआई तक पहुंचा। हालांकि सुशील पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ। 74 किलो के पहलवान प्रवीण राणा ने राष्ट्रमंडल खेलों के ट्रायल के दौरान सुशील पर उन्हें साथियों से पिटवाने का आरोप लगवाया। यह मामला भी काफी सुर्खियों में आया। कुश्ती के नजदीक रहने वालों को उसी दौरान अहसास हो गया था कि अब सुशील की प्राथमिकता में पहलवानी नहीं बल्कि अन्य चीजें शामिल हो गई हैं।