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रेफरी की गलती से हारे ओलंपिक मेडलिस्ट सुशील कुमार: सतपाल सिंह

Tue, 21 Aug 2018 06:34 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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सुशील कुमार
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ओलंपिक में कांसा और रजत जीत चुके भारत के धुरंधर पहलवान सुशील कुमार की जकार्ता एशियाई खेलों में 74 किलो ग्राम फ्री स्टाइल स्पर्धा के क्वॉलिफिकेशन दौर में बहरीन के एडम बातिरोव के हाथों सनसनीखेज हार के लिए उनके उस्ताद और ससुर सतपाल सिंह रेफरी की एक गलत चेतावनी को जिम्मेदार मानते हैं।

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सतपाल कहते हैं कि जहां सुशील की हार का जहां अफसोस है वहीं बजरंग पूनिया की फ्री स्टाइल के 65 किलोग्राम वर्ग में सूझबूझ के बूते जापान के दाइची ताकाचीनी पर फाइनल में 11-8 से जीत की बेहद खुशी है। सतपाल कहते हैं बजरंग ने हमारे छत्रसाल स्टेडियम में कुश्ती का बारीकियां सीखी और आखिर जकार्ता में अपनी स्पर्धाजीत कर देश का नाम रोशन किया।

सतपाल ने सोमवार को 'अमर उजाला' से कहा, 'सुशील अपने प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ 2-0 से आगे थे।  रेफरी के गलत ढंग से चेतावनी (कॉशंस) देने से सुशील की लय गड़बड़ा गई और वह पिछड़े और मुकाबला 3-5 से हार गए। रेफरी के चेतावनी देने के बाद भी सुशील के पास वक्त था क्योंकि पूरी कुश्ती छह मिनट की थी, लेकिन वह बस वापसी कर ही नहीं पाए।'

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कोच के साथ सुशील - फोटो : AmarUjala
उन्होंने कहा, 'सुशील की तैयारियों में कतई कोई कहीं कमी नहीं थी। सुशील ने पिछले करीब छह महीनों से बच्चों और परिवार को छोड़ कर पूरी तरह फोकस होकर एशियाई में अपनी स्पर्धाकी तैयारी की थी। दरअसल सुशील जिस तरह खेलना चाहते थे, वैसा खेल नहीं पाए।'

'मैं भी सुशील की इस बात से इत्तफाक रखता हूं कि हार जीत खेल का हिस्सा है।  सुशील ने एशियाई खेलों में इस बार स्वर्ण पदक जीतने के लिए छह महीने सब कुछ छोड़ कर शिद्दत से मेहनत की थी। कई बार आपको मेहनत का सिला नहीं मिलता। शायद यही सुशील के साथ हुआ। इससे सुशील के ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वर्ल्ड चैंपियनशिप में अच्छे प्रदर्शन से सुशील टोक्यो ओलंपिक के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं।'

उन्होंने कहा, 'अभी सुशील में बहुत कुश्ती बाकी है। सुशील अब जब स्वदेश लौटेंगे तो उनके साथ मिलकर भविष्य की रणनीति बनाएंगे। इस पर विचार करेंगे कि कहां और क्या, गलती क्यों हुई। आगे के लिए तैयारी पर विस्तृत चर्चा करेंगे।'
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'बजरंग ने धैर्य दिखा जीता स्वर्ण, ओलंपिक आगे मेहनत की जरूरत'

BAJRANG PUNIA
सतपाल कहते हैं, 'बजरंग बहुत ही शानदार ढंग से फाइनल तक लड़े और सुनहरी कामयाबी हासिल करने में सफल रहे। उनकी जीत की बेहद खुशी है। बजरंग ने फाइनल में जापानी पहलवान के खिलाफ 7-0की  बढ़त ले। जापानी पहलवान के 8-8 की बराबरी पाने के बाद भी बजरंग पूनिया ने उतावलेपन की बजाय बहुत धैर्य रखा  और रणनीतिक कुशलता दिखाते हुए इस अपने शानदार प्रदर्शन को लगातार आगे ले जाने का सिलसिला जारी रखा।

अपने प्रदर्शन को  यूं ओलंपिक  के स्तर तक ले जाने के लिए बजरंग को इसी तरह बराबर मेहनत जारी रखनी होगी।  बजरंग (पूनिया ) भी अपने ही छत्रसाल स्टेडियम के हैं। कुश्ती का ककहरा और शुरुआती बारीकियां उन्हरेंने छत्रसाल स्टेडियम में ही सीखी। वह बहुत शानदार ढंग से कुश्ती लड़े और जापानी पहलवान को शिकस्त देने में कामयाब रहे।' 
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