सुमित को ऑस्ट्रेलियन ओपन के क्वालिफायर में ही हार का सामना करना पड़ा। सुमित के मुताबिक वह दिसंबर के अंत में बीमार पड़ गए थे। जिसके चलते कुछ दिनों तक प्रैक्टिस नहीं कर पाए और आठ-नौ सप्ताह तक कोई टूर्नामेंट नहीं खेले। बीमारी के चलते उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन से पहले एक चैलेंजर टूर्नामेंट से नाम वापस लेना पड़ा। अब वह ठीक महसूस कर रहे हैं। साशा के साथ ट्रेनिंग कर रहे हैं और ट्रेनर मिलोस भी उनके साथ हैं।
ग्रैंड स्लैम पहले दौर की बाधा तोडना चुनौती
सुमित स्वीकार करते हैं कि पिछले चार-पांच साल में ग्रैंड स्लैम में भारतीयों के लिए सिंगल्स में अच्छे परिणाम नहीं आए हैं, लेकिन सोमदेव, सानिया मिर्जा, लिएंडर पेस, विजय अमृतराज, रमेश कृष्णन ग्रैंड स्लैम में आगे बढ़ते रहे हैं। सुमित कहते हैं कि ग्रैंड स्लैम इतना आसान नहीं है। उन्होंने अपना पहला स्लैम मैच फेडरर के खिलाफ खेला। भारतीय खिलाड़ी चैलेंजर से ग्रैंड स्लैम खेल रहे हैं। फिर यहां पहले दौर में बड़े खिलाड़ी से सामना हो जाए तो उसे हराना आसान नहीं होता है। स्लैम में अच्छे प्रदर्शन के लिए खिलाड़ी का साल भर टॉप 100 में रहना जरूरी है, जो सोमदेव ने किया। उनकी भी यही कोरै रहेगी। मुझ लगता है कि मैं यह कर सकता हूं और मैं इसकेबारे में बेहद सकारात्मक हूं।