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बजरंग पूनिया को मिला खेल जगत का सर्वोच्च सम्मान, रिजिजू ने खेल रत्न अवॉर्ड से किया सम्मानित

Fri, 29 Nov 2019 07:22 AM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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किरण रिजिजू ,बजरंग पूनिया - फोटो : सोशल मीडिया
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भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया को बुधवार को राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। खेलमंत्री किरण रिजिजू ने उन्हें यह सम्मान देकर सम्मानित किया। यह अवॉर्ड खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च सम्मान है। 25 साल के पूनिया को कुश्ती के क्षेत्र में लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए यह अवॉर्ड दिया गया है।

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बता दें कि राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में राष्ट्रपति के हाथों का देश का सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न ग्रहण करना हर खिलाड़ी का सपना होता है। मगर ओलंपिक क्वालिफाई करने के लिए पहलवान बजरंग ने अपने जीवन के इस अनमोल क्षण को त्यागने का फैसला कर अपना कद और ऊंचा कर लिया था।

16 अगस्त को राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड के लिए चुने गए बजरंग 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों खेल रत्न ग्रहण करने नहीं आए थे। बता दें कि वह कजाखस्तान में होने वाले वर्ल्ड चैंपियनशिप में व्यस्त थे।
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मालूम हो कि बजरंग ने उस वक्त कहा था, 'वह अवार्ड लेने आना चाहते थे, लेकिन फिर सोचा अवार्ड तो मिल ही गया है। अगर रूस से दिल्ली गया तो ट्रेनिंग बाधित होगी। अवार्ड बाद में भी मिल जाएगा लेकिन विश्व चैंपियनशिप बाद में नहीं आएगी।' वह विश्व चैंपियनशिप के बाद खेल मंत्री किरण रिजीजू के हाथों अवार्ड ले लेंगे।

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ओलंपिक में दिखूंगा नए रूप मेंः पूनिया

बजरंग पूनिया ने कहा कि कुश्ती जगत टोक्यो ओलिंपिक में उन्हें नए रूप में देखेगा। बजरंग टोक्यो ओलिंपिक में भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीदों में से एक हैं। 'लेग डिफेंस' उनकी कमजोरी रहा है और उनके विरोधियों ने इसका फायदा हमेशा उठाया है।

कई विशेषज्ञों को मानना है कि ओलिंपिक में यह कमजोरी उन पर भारी पड़ सकती है। इस कमजोरी के बावजूद वह 2018 में 65 किलो वर्ग में दुनिया के नंबर एक पहलवान बने।

उन्होंने कहा,‘मेरे कोच का कहना है कि दोबारा मैट पर उतरने पर मुझे अपने विरोधी को चौंकाने का शऊर आना चाहिए। मैं बताऊंगा नहीं कि क्या कर रहा हूं लेकिन टोक्यो में मैट पर आपको एक नया बजरंग देखने को मिलेगा।’ उन्होंने कहा,‘लोग कहेंगे कि बजरंग का खेल बिल्कुल बदल गया है। चाहे तकनीक हो, दम खम या शैली, सभी पर मैंने काम किया है।’
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