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विश्व बीच पेंचक सिलाट: पहली बार हुई इस चैंपियनशिप में सूरज ने जीता कांस्य पदक, साझा किए अनुभव

Mon, 07 Oct 2019 04:17 PM IST
Rajeev Rai राजीव राय, अमर उजाला
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सूरज कुमार श्रीवास्तव - फोटो : amar ujala
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थाईलैंड के फुकेत में पहली बार विश्व बीच पेंचक सिलाट 2019 का आयोजन किया गया। 30 सितम्बर से चार अक्तूबर तक, पांच दिनों के इस टूर्नामेंट में 35 देशों के तकरीबन 350 खिलाड़ियों ने अलग-अलग भारवर्ग में हिस्सा लिया और मेडल अपने नाम किए।

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भारत की तरफ से भी इस टूर्नामेंट में 20 सदस्यों वाले दल ने हिस्सा लिया जिसमें उसे नौ कांस्य पदक मिले। इसी टूर्नामेंट में 85-90 किग्रा भारवर्ग में उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ के रहने वाले सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने भी हिस्सा लिया और कांस्य पदक जीतकर वापस लौटे और 'अमर उजाला' से अपने अनुभव साझा किए।

कांस्य पदक का सफर

सूरज प्रकाश श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला
सूरज ने अपने सफर के बारे में बात करते हुए बताया कि वे पहले मार्शल आर्ट में भाग लेते थे उसके बाद उनके कोच ने उन्हें मार्शल आर्ट के ही एक किस्म 'पेंचक सिलाट' के बारे में बताया और उन्हें इसमें आने की सलाह दी। हालांकि शहर और जनपद में सुविधाओं के अभाव की वजह से उन्हें शहर से बाहर जाकर अलग-अलग ट्रेनिंग कैम्पों में हिस्सा लेना होता था और प्रैक्टिस करना पड़ता था। सूरज ने इसके बावजूद कड़ी मेहनत की और इसमें देश का नाम रोशन किया।

 

युवाओं और महिलाओं के लिए शानदार खेल

सूरज प्रकाश - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला से बातचीत में सूरज ने इस बात पर जोर दिया कि यह खेल जोखिम भरा नहीं है और बाकी खेलों की तुलना में थोड़ा आसान भी है। अगर इसमें मेहनत की जाए तो अच्छा प्रदर्शन कर आगे बढ़ा जा सकता है।

महिलाओं को सिखाता है 'आत्मरक्षा'

इस खेल की महत्ता के बारे में बताते हुए सूरज ने कहा कि इस खेल के कई फायदे हैं जैसे यह किसी मुश्किल वक्त में महिलाओं की आत्मरक्षा के काम आ सकता है, इससे फिटनेस भी सही रहती है और साथ-साथ ही इस खेल में आगे बढ़ने का भी काफी स्कोप है।

सरकार और योजनाओं से मदद

सरकार की तरफ से मिलने वाली मदद को लेकर सूरज ने बताया कि नरेन्द्र मोदी सरकार में खेलों के क्षेत्र में बहुत काम हुआ है और हर खेल में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस खेल के प्रोत्साहन के लिए स्कॉलरशिप जैसे कई सारे कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है भविष्य में हमें जिलास्तर पर इस खेल से जुडी मूलभूत सुविधाएं और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण मिलेगा।
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स्कूली बच्चियों को देते हैं आत्मरक्षा की ट्रेनिंग

खेल से अलग सूरज ने बताया कि वो आजमगढ़ में कई महिला विद्यालयों में जिलाधिकारी की मदद से बच्चियों को आत्मरक्षा (self defence) की ट्रेनिंग देते हैं और खेल के बारे में भी बताते हैं। उनकी कोशिश है कि इस खेल से अधिक से अधिक युवा खासकर महिलाएं जुड़ें।
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