फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CWG: चंडीगढ़ में होगी शूटिंग और आर्चरी की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, बर्मिंघम की तालिका में जुड़ेंगे पदक

Tue, 25 Feb 2020 10:36 AM IST
Rajeev Rai अमर उजाला ब्यूरो

सार

  • कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन ने शूटिंग और आर्चरी की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप को चंडीगढ़ में कराने की दी मंजूरी
  • बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में जुड़ेंगे चंडीगढ़ के पदक 
विज्ञापन
भारतीय निशानेबाजी - फोटो : ट्विटर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेेशन (सीजीएफ) ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए चंडीगढ़ में होने वाली शूटिंग और आर्चरी की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के पदकों को 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक तालिका में शामिल करने को मंजूरी दे दी है। इन दोनों खेलों की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप जनवरी 2022 में चंडीगढ़ में होगी, जबकि कॉमनवेल्थ गेम्स इसी साल बर्मिंघ में होंगे। हालांकि सीजीएफ ने यह भी कहा है कि शूटिंग, आर्चरी के पदकों को मुख्य कॉमनवेल्थ गेम्स के समापन समारोह के एक सप्ताह बाद तालिका में जोड़कर आधिकारिक रैंकिंग जारी की जाएगी।

विज्ञापन


शूटिंग को 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर करने के खिलाफ भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) और एनआरएआई की ओर से छेड़ी गई बगावत ने आखिर रंग दिखा दिया है। आईओए के अध्यक्ष नरेंदर बत्रा ने तो खेलों का बायकाट करने की बात कह दी थी। इसके बाद ही बीते वर्ष नवंबर माह में सीजीएफ की अध्यक्ष डेम लुइस मार्टिन और सीईओ डेविड ग्रेवेमबर्ग को बातचीत के लिए दिल्ली आना पड़ा। दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत के बाद के बाद प्रस्ताव रखा गया कि शूटिंग और आर्चरी की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में भारत आयोजित करेगा। मार्टिन ने इस प्रस्ताव को सीजीएफ कार्यकारिणी में रखने की बात कही, जिसे सोमवार को मंजूरी दे दी गई।

चैंपियनशिप का खर्च मंत्रालय व एनआरएआई उठाएंगे

एनआरआई के अध्यक्ष रणइंदर सिंह साफ कर चुके हैं कि शूटिंग चैंपियनशिप का सारा खर्च (करीब 10 करोड़ रुपये) एनआरएआई उठाएगी, जबकि आर्चरी का खर्च (करीब चार करोड़) खेल मंत्रालय उठाएगा। एनआरएआई सभी शूटरों की यात्रा से लेकर रहने, खाने  का खर्च उठाएगा।

सीजीएफ ने माना मील का पत्थर साबित होगा प्रयोग

सीजीएफ ने स्वीकार किया है कि भारत की ओर से दिखाया गया यह रास्ता खेलों की दुनिया में मील का पत्थर साबित हो सकता है। सीजीएफ के सीईओ डेविड  ग्रेवेमबर्ग मानते हैं कि उनकी ओर से इस प्रयोग पर बारीकी से निगाह रखी जाएगी, साथ ही इसकी  समीक्षा की जाएगी। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो खेलों के आयोजन के खर्च का पड़ने वाला बोझ एक देश के जिम्मे न रहकर दो देश आपस में बांट लेंगे। कॉमनवेल्थ चैैंपियनशिप कराने के लिए भारत ने कूटनीति अपनाते हुए ब्रिटिश सांसदों से वहां की संसद तक में अभियान चलवाया।
विज्ञापन

दो सदस्यों ने किया विरोध

ग्रेवेमबर्ग साफ करते हैं कि दोनों आयोजन पूरी तरह अलग होंगे। इन्हें एक नहीं माना जाएगा। ग्रेवेमबर्ग ने कहा कि सीजीएफ कार्यकारिणी ने यह फैसला सर्वसम्मति से लिया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि दो सदस्य इस प्रयोग के पक्ष में नहीं थे। शूटिंग और तीरंदाजी को कॉमनवेल्थ गेम्स अभियान का हिस्सा बनाने के लिए भारतीय मूल के सांसद करन बिलमोरिया और कोलिन मॉनीहॉन ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स बिल में संशोधन तक करवा दिया। इसमें दोनों एलिएस्टर जैक का भी साथ मिला। संसद में चले अभियान के बाद ही शूटिंग और तीरंदाजी को अलग तरह से जोड़ने का रास्ता साफ हुआ।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें