एशियाई एयरगन चैंपियनशिप का गोल्ड, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में सोने का तमगा, नेशनल चैंपियन होने का गौरव यही नहीं ट्रायल में दूसरे स्थान की रैंकिंग बावजूद इसके शहजर रिजवी को गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स की टीम में जगह नहीं मिली।
रैंकिंग के बावजूद मेरठ के इस शूटर पर
जीतू राय के अनुभव को वरीयता देकर उन्हें टीम से बाहर रखा गया। शहजर भी निराश थे और उनकी नियोक्ता एयरफोर्स के अधिकारी भी। एनआरएआई से बात करने पर भी हल नहीं निकला तो शहजर के अधिकारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया, लेकिन यहां उनके पिता शमशाद अहमद रिजवी ने रोक दिया।
उन्होंने कहा कि इस अन्याय का जवाब अदालत जाकर नहीं बल्कि अपनी पिस्टल से दो। शमशाद अमर उजाला से गर्व से कहते हैं कि उनके बेटे ने वर्ल्ड कप का गोल्ड जीत पिस्टल से करारा जवाब दिया है।
शमशाद खुलासा करते हैं कि शहजर और एयरफोर्स के अधिकारी उनका चयन नहीं करने पर खासे नाराज थे। एनआरएआई ने जब कहा कि कोटा कम किए जाने के चलते चयन नहीं हुआ है तो उनसे कहा गया कि फिर ट्रायल नहीं कराने थे। हालांकि शहजर का चयन मेक्सिको वर्ल्ड कप के लिए किया गया।
यह उनका पहला वर्ल्ड कप था और यहीं उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल के वर्ल्ड रिकार्ड के साथ गोल्ड जीता। शमशाद का कहना कि 23 साल के शहजर के पास उम्र पड़ी है। वह एशियन गेम्स, ओलंपिक को लक्ष्य बनाए हैं। गोल्ड जीतने के बाद उन्होंने शहजर से कहा कि जब राष्ट्रगान बजा तो सीना 56 की बजाय 57 इंच का हो गया।
दोनों आंखें खोल शूटिंग करने वाला अनोखा शूटर
शूटिंग में शूटर एक आंख पर आई ब्लाइंडर (आंख बंद करने के लिए) लगाकर खेलते हैं, लेकिन शहजर ऐसे अनोखे शूटर हैं जो दोनों आंखें खोलकर शूटिंग करते हैं। कल भी उन्होंने वर्ल्ड रिकार्ड दोनों आंखें खोलकर शूटिंग कर बनाया। शमशाद खुलासा करते हैं कि वह शुरू से ऐसा करता है। उसे लगता था कि आंख बंद करने से उसकी एक आंख छोटी हो जाएगी। बाद में उसे इसकी आदत पड़ गई। एयरफोर्स में उसकी नौकरी इसी खूबी पर लगी।