डोपिंग के झूठे केस से दागमुक्त होने के बाद दो बार की कॉमननवेल्थ गेम्स चैंपियन संजीता चानू को खेल मंत्रालय अर्जुन अवार्ड देने जा रहा है। मंत्रालय दो साल पहले अवार्ड कमेटी की ओर से संजीता के पक्ष में लिए गए फैसले को लागू करेगा। अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग संघ (आईडब्लूएफ) की ओर से डोपिंग के केस में फंसने से पहले संजीता अर्जुन अवार्ड के लिए अदालती लड़ाई लड़ रही थीं। अदालत ने ही खेल मंत्रालय को आदेश दिया था कि संजीता के डोप मुक्त होने के बाद ही अवार्ड कमेटी के फैसले को सार्वजनिक किया जाए।
कमेटी के फैसले में निकला संजीता का नाम
आईडब्लूएफ की ओर से संजीता को डोप मुक्त किए जाने के बाद भारतीय वेटलिफ्टिंग संघ ने खेल मंत्रालय से गुहार लगाई थी कि 2018 में अवार्ड कमेटी की ओर से संजीता पर लिए गए फैसले को सार्वजनिक किया जाए। सूत्रों के मुताबिक फेडरेशन के इस पत्र के बाद मंत्रालय ने कमेटी के फैसले को खोला। जिसमें संजीता को डोपिंग के आरोपों से मुक्त होने के बाद ही अर्जुन अवार्ड दिए जाने के लिए कहा गया है। कमेटी के इस फैसले को आधार बनाते हुए मंत्रालय 2014 और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स की चैंपियन संजीता को अर्जुन अवार्ड देगा। अगर कमेटी के फैसले में संजीता का नाम नहीं निकलता तो उन्हें फिर से अर्जुन अवार्ड के लिए आवेदन करना होता।
अपनी तरह का अनोखा फैसला
वैसे तो अदालत की लड़ाई लड़कर राष्ट्रीय खेल पुरस्कार पाने के कई उदाहरण हैं, लेकिन ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता है जब किसी खिलाड़ी को अवार्ड दिए जाने का फैसला सुरक्षित रख लिया गया हो और उसे डोपिंग के आरोपों से मुक्त होने के बाद ही अवार्ड दिए जाने को कहा गया हो।