आईडब्लूएफ ने साफ किया है कि वाडा ने 28 मई को उन्हें बताया कि अमेरिका की सॉल्ट लेक सिटी की लैब में संजीता के सैंपल के आईआरएमएस परीक्षण में समानता नहीं होने के कारण खिलाड़ी के खिलाफ जारी केस को बंद किया जाए। इस बीच आठ जून को भारतीय वेटलिफ्टिंग संघ ने भी आईडब्लूएफ से संजीता के केस पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इसके बाद आईडब्लूएफ ने दो साल एक माह बाद संजीता पर लगे डोपिंग के आरोप वापस ले लिए।
ओलंपिक क्वालिफाई से दूर करने का जिम्मेदार कौन
इन आरोपों के चलते टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने का मौका खोने वाली संजीता आईडब्लूएफ से भारी भरकम हर्जाना मांगने जा रही हैं। संजीता का कहना है कि टोक्यो के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाना और इतने दिनों तक मानसिक प्रताडना झेलने का हर्जाना कौन देगा? इसके लिए सीधे तौर पर आईडब्लूएफ जिम्मेदार है।
संजीता का कहना है कि उनके साथ भद्दा मजाक हुआ है, जिसमें उनका पूरा करियर दांव पर लग गया। 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में 48 और 2018 में 53 किलो में स्वर्ण जीतने वाली संजीता के सैंपल में नौ जनवरी 2018 को टेस्टोस्टोरान पाया गया था। उनके यूरिन सैंपल के दो नंबर भेजे गए। यह गलती आईडब्लूएफ ने स्वीकार की थी। 22 जनवरी 2019 को उन पर लगे अस्थाई प्रतिबंध को भी हटा दिया गया। तब से उनका केस लंबित पड़ा था।