महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान दिलाने के उद्देश्य से हाल ही में हम सबने आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया है। हमारे समाज में जितना योगदान पुरुषों का है उतना ही महिलाओं का भी है लेकिन कई बार उन्हें बराबरी का हक नहीं मिल पाता है।मगर खेल जगत ने इस खाई को भरने की पूरजोर कोशिश की है और काफी हद तक सफल भी हुई है। बीबीसी की ताजा स्टडी से पता चलता है कि 48 में से 37 खेलों में अब महिला खिलाड़ियों को पुरुष खिलाड़ियों जितनी ही पुरस्कार राशि मिलने लगी है। यानी 90 फीसदी खेलों के बड़े मुकाबलों में समान राशि दी जाने लगी है।
सबसे बड़ा बदलाव क्रिकेट में
अगर बात करें तो सबसे बड़ा बदलाव क्रिकेट में दिखाई दिया है। 2021 में होने जा रहे 'द 100' टूर्नामेंट में पुरुष-महिलाओं के लिए समान पुरस्कार राशि (1.52 करोड़) रखी गई है। बिग बैश लीग (बीबीएल) में तो 2017-18 में ही यह कर दिया गया था। 2020 के टी-20 महिला विश्व कप में 7.29 करोड़ रुपए दिए, इतने ही पैसे पुरुषों को 2021 के टूर्नामेंट में जीतने पर मिलेंगे।
खेलों में भेदभाव मिटाने की शुरुआत 60 के दशक से ही शुरू
इसी तरह 2022 के महिला विश्व कप के लिए 25.53 करोड़ राशि तय है। 2017 में कुल तय राशि 14.59 करोड़ में से इंग्लैंड की महिला टीम ने 4.81 करोड़ रुपए जीते थे। जबकि पुरुष टीम ने 2019 में कुल फंड 72.93 करोड़ रुपए में से 29.17 करोड़ रुपए जीते थे। हालांकि खेलों में भेदभाव मिटाने की शुरुआत 60 के दशक में ही हो गई थी। तब से अब तक बदलाव जारी हैं।