-सरकारी निजी भागीदारी के तहत सबसे पहले इस स्टेडियम को बनाया जाएगा कमाऊ पूत
-स्टेडियम में व्यापारिक संभावनाएं तलाशने को इसी माह नियुक्त होगा ट्रांजेक्शन सलाहकार
खेल जगत में देश की नाक कहे जाने वाले दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम को सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत निजी हाथों में देने की तैयारी कर ली गई है। स्टेडियम के अंदर खेलों के अलावा व्यापारिक गतिविधियों का खाका खींचने के लिए खेल मंत्रालय की ओर से इस माह के अंत में ट्रांजेक्शन सलाहकार नियुक्त कर दिया जाएगा।
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सलाहकार की रिपोर्ट आने के बाद ही 1982 के एशियाई खेल और 2010 के राष्ट्रमंडल खेल आयोजित करने वाले नेहरू स्टेडियम को निजी हाथों में सौंपा जाएगा। इसके बाद राजधानी के बाकी चार स्टेडियमों को भी निजी क्षेत्र को सौंप दिया जाएगा। स्टेडियमों को कमाऊ पूत बनाने के लिए निजी क्षेत्र को सौंपने का फैसला एनडीए-1 सरकार में हुआ था।
इसकी जिम्मेदारी नीति आयोग को सौंपी गई थी, लेकिन भारी विरोध के चलते अंतिम क्षणों में इस फैसले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब एक बार फिर इस फैसले को लागू करने की तैयारी है। खेल मंत्रालय और नीति आयोग के बीच इस मुद्दे को लेकर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। स्टेडियम के किस हिस्से में किस तरह की व्यापारिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है।
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कमाई भी होगी और खेल गतिविधि बढ़ेगी : मंत्रालय का उद्देश्य है कि स्टेडियमों को निजी हाथों में देने से यहां से कमाई भी होगी और खेल गतिविधियों को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा। अभी स्टेडियमों की देखभाल की जिम्मेदारी साई के पास है, जो खर्चीला काम साबित हो रहा है। मंत्रालय चाहता है कि स्टेडियम व्यापारिक गतिविधियां चलाई जाएं लेकिन उससे खेल की गतिविधियां बाधित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इन्हें और मजबूत किया जाएगा। स्टेडियम की खाली पड़ी जगहों पर मॉल, होटल, कॉमर्शियल कांप्लेक्स जैसी गतिविधियों की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। दिल्ली में इस स्टेडियम के अलावा मेजर ध्यानचंद स्टेडियम, आईजी स्टेडियम कांप्लेक्स, कर्णी सिंह शूटिंग रेंज और तालकटोरा स्वीमिंग स्टेडियम शामिल हैं।