प्रवीण खुलासा करते हैं कि पिता के पास कैमरे वाला मोबाइल नहीं है। उन्हें छोटे भाई ने बताया कि वह विश्व चैंपियन बन गए हैं। इसके बाद पिता से बात हुई तो उन्होंने कहा कि वह इस खेल में और अच्छा करें।
प्रवीण के मुताबिक घर के हालात काफी खराब होने के चलते वह कई बार टूर्नामेंट खेलने नहीं जा पाते थे। पैसे नहीं होते थे। तब उनके मामा ने उनकी काफी मदद की। वह उनसे पैसे लेकर टूर्नामेंट खेलने जाते थे। प्रवीण सफलता का श्रेय कुलदीप हांडू को देते हैं। जम्मू कश्मीर के हांडू की कोचिंग में पिछले कई सालों से वूशु में अच्छा प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन आवेदन और ज्यादा अंक होने के बावजूद उन्हें द्रोणाचार्य अवार्ड से हर बार नजरअंदाज कर दिया जाता है।