अमेरिकी खेल बाजार की नजरें भारत के बढ़ते खेल बाजार और दर्शकों पर है। अमेरिका में खेले जाने वाले कई खेले जैसे कि बेसबॉल और बॉस्केटबॉल भारत में बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं हैं। बेसबॉल भारत में अमूमन नहीं खेला जाता है लेकिन बास्केटबॉल धीरे-धीरे युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। भारतीय युवा NBA यानी नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन के मैचों में रुची लेने लगे हैं। ज्यादा से ज्यादा भारतीयों को अपनी ओर आकर्षित करने और जोड़ने के लिए हिंदी को अपना हथियार बना रहे हैं।
एनबीए ने पिछले साल अप्रैल में भारतीयों के लिए हिंदी में वेबसाइट लॉन्च की। जिसमें भारतीय बास्केटबॉल से जुड़ी खबरें भी होती हैं। एनबीए टीम सेक्रामेंटो किंग्स ने भारतीयों से हिंदी के जरिए जुड़ने की पहल की थी। हालांकि उनकी ये योजना अच्छी तरह परवान नहीं चढ़ सकी। बावजूद इसके ये बात तो समझ में आती है कि दुनिया भर की इंडस्ट्री को ये बात समझ में आने लगी है कि भारत के युवाओं को अगर रिझाना है तो उन्हें हिंदी में यानी उनकी भाषा में उनसे संवाद करना होगा। तभी मजबूत और अटूट रिश्ते बनेंगे।
एनबीए टीम सेक्रामेंटो किंग्स के मालिक और मालिक भारतीय मूल के विवेक रणदीव है। वो इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि हिंदी के जरिए ही भारतीयों को एनबीए से जोड़ा जा सकता है। उन्होंन अपनी टीम के प्रशंसकों का आधार बढ़ान के लिए भारत में हिंदी का हाथ पकड़ा। भले ही वो अपनी कार्ययोजना में सफल नहीं हुए लेकिन उनकी इस पहल से लोगों का ध्यान उनकी तरफ तो गया।
भारतीय मूल के या भारतीय खिलाड़ियों का एनबीए से नाता बेहद कम रहा है। बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ नहीं होंगे कि सिम भुल्लर एनबीए में खेलने वाले पहले भारतीय मूल के खिलाड़ी थी। मूल रूप से पंजाब के रहने वाले सतनाम सिंह एनबीए में खेलने वाले पहले भारतीय बने हैं । ऐसे में ज्यादा से ज्यादा संख्या में भारतीयों को एनबीए कदम उठा रहा है।