खेल मंत्री किरन रिजिजू की अगुवाई में हुई नेशनल स्पोट्र्स डेवलपमेंट बोर्ड (एनएसडीएफ) की बैठक में साई सेंटरों के कायाकल्प को यह प्रस्ताव रखा गया। खेल मंत्री खुद सभी के समक्ष यह प्रस्ताव रख उनसे सेंटरों को अपनाने को कहेंगे। इससे कारपोरेट घरानों का तो नाम होगा ही साथ ही साई सेंटरों की दशा भी सुधरेगी।
इस वक्त देश में साई के 56 ट्रेनिंग सेंटर (एसटीसी) हैं। जहां जमीनी स्तर से निकलकर उभरते खिलाडियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा पटियाला और त्रिवेंद्रम में दो शिक्षण और ट्रेनिंग संस्थान, साथ ही लखनऊ, सोनीपत, चंडीगढ़ समेत 10 क्षेत्रीय केंद्र और 14 सेंटर ऑफ एक्सिलेंस हैं। इन सभी जगहों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीमों के अलावा जमीनी स्तर के खिलाडियों की ट्रेनिंग होती है।
सिर्फ साई सेंटर ही नहीं बल्कि मंत्रालय कॉरपोरेट घरानों के आगे एक खेल को अपनाने का भी प्रस्ताव रखेगा। इस खेल के जमीनी स्तर के विकास की जिम्मेदारी कारपोरेट घराने की होगी। यह ठीक वैसा ही प्रस्ताव है जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मंत्रालय से एक राज्य एक खेल की नीति बनाने को कहा था। इसके तहत मंत्रालय ने कई राज्यों से बात कर एक खेल को अपनाने की योजना अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। इसी तरह फिक्की, एसोचैम, सीआईआई के प्रबंध निदेशकों के समक्ष कारपोरेट घरानों को एक खेल अपनाने को कहा जाएगा। इसके तहत उस खेल के खिलाड़ी की ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलने पर आने वाले खर्च की जिम्मेदारी घराने की होगी।