राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों का चयन हो और विवाद सामने नहीं आएं ऐसा होना मुश्किल है। इस बार विवाद खेल मंत्रालय की ओर से गठित अवार्ड कमेटी से ही शुरू हो गया है। इसके केंद्र बिंदु में और कोई नहीं बल्कि हाल-फिलहाल विश्व चैंपियनशिप के चयन को लेकर विवाद में घिरीं दिग्गज बॉक्सर एमस मैरी कॉम हैं।
मंत्रालय ने 12 सदस्यीय कमेटी में मैरी कॉम को शामिल तो कर लिया है, लेकिन उन पर बन रहे हितों के टकराव के मामले को नजरअंदाज कर दिया गया। खुद मंत्रालय में ही इसके खिलाफ आवाजें उठ खड़ी हुई हैं। दरअसल जिस एकमात्र अवार्ड कमेटी में मैरी रखी गई हैं उस अवार्ड की दौड़ में उनका खुद का कोच है।
मैरी के वर्तमान कोच ने द्रोणाचार्य अवार्ड के लिए आवेदन कर रखा है। वह मैरी के साथ कैंप में भी शामिल हैं। इस बार मंत्रालय ने पहली बार ऐसा किया है जब अवार्ड केलिए चार अलग कमेटियों के गठन के स्थान पर एक कमेटी ही बना दी है।
सूत्र बताते हैं कि मैरी को कमेटी में रखे जाने पर मंत्रालय में ही यह बात उठी थी कि उनके खिलाफ हितों के टकराव का मामला बनता है। एक तो वह वर्तमान खिलाड़ी हैं। कुछ अपवादों को छोड़कर कमेटी में वर्तमान खिलाडिय़ों को रखने की परंपरा नहीं रही है, लेकिन उनके कद और अनुभव को देखते हुए मंत्रालय ने उन्हें प्रतिष्ठित कमेटी में जगह दी है। फिर उनके खुद के कोच केबारे में वह फैसला कैसे ले सकती हैं?
हितों के टकराव पर मचा है बवाल
बीसीसीआई में हितों के टकराव को तरजीह दी जा रही है। जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के बाद बोर्ड में हितों के टकराव के मामले गाहे-बगाहे उठते रहते हैं। इसके शिकार वीवीएस लक्ष्मण और सचिन तेंदुलकर जैसे क्रिकेटर भी रहे हैं। हाल ही में क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी में शामिल इन दोनों क्रिकेटरों पर हितों के टकराव के मामले की सुनवाई हुई थी।