दरअसल, गुरुवार को बिंद्रा ने जरीन की मैरीकॉम के खिलाफ ट्रायल कराने की मांग का समर्थन किया था, लेकिन ओलंपिक कांस्य पदकधारी मेरीकॉम को यह बात पसंद नहीं आई।
इसके पहले भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) ने कहा था कि मैरीकॉम (51 किग्रा) के हाल में रूस में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए वह छह बार की विश्व चैंपियन को चुनने का इरादा रखता है।
उन्होंने कहा, 'मैंने सैफ खेलों के बाद से उसे कई बार हराया है, लेकिन वह फिर भी मुझे चुनौती देती रहती है। मेरा मतलब है कि इसकी क्या जरूरत है? यह महज एक औपचारिकता है। बीएफआई भी जानता है कि ओलिंपिक में कौन पदक जीत सकता है।'
मैरी कॉम ने कहा, 'लोग मुझसे ईर्ष्या करते हैं।' उन्होंने कहा, 'यह पहले भी मेरे साथ हो चुका है। रिंग में प्रदर्शन करो, यही सही चीज है। बीएफआई हमें विदेशी दौरों पर भेजता है इसलिए स्वर्ण पदक के साथ लौटो और खुद को साबित करो।'
मैरीकॉम ने कहा, 'मैं उनके खिलाफ नहीं हूं। वह भविष्य में अच्छी हो सकती हैं, उसे अनुभव लेना चाहिए और उच्च स्तर के लिए तैयारियों पर ध्यान लगाना चाहिए। मैं पिछले 20 वर्षों से रिंग में लड़ रही हूं।' पुरुष टीम के चयन के लिए बीएफआई ने फैसला किया कि विश्व चैंपियनशिप के पदकधारियों को सीधे पहले ओलिंपिक क्वॉलिफायर के लिए भेजा जाएगा।
वहीं महिला वर्ग में बीएफआई ने पहले कहा था कि विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक विजेता मुक्केबाजों का ही फरवरी में होने वाले ओलिंपिक क्वॉलिफायर के लिए सीधे चयन होगा। हालांकि बीएफआई ने अब जरीन की मांग पर अगले हफ्ते चयन समिति की बैठक बुलाने का फैसला किया है।
मैरीकॉम ने कहा कि चयन मानदंड में पुरुष और महिला वर्गों में नियम अलग अलग नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैं इसकी परवाह नहीं करती। बीएफआई को फैसला करना चाहिए। इसमें लैंगिक समानता होनी चाहिए, पुरुषों और महिला वर्गों के लिए अलग नियम नहीं हो सकते।'