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मंजू रानी ने विश्व चैंपियनशिप में जीता था रजत पदक, अब विधवा मां और छोटे भाई की खुशियां पूरी करेंगी

Thu, 17 Oct 2019 08:27 AM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क,अमर उजाला
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मंजू रानी - फोटो : social media
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बहनों की चिंता का अधिकार सिर्फ भाईयों को ही नहीं है। बहनें भी भाई की जिंदगी बदल सकती हैं। विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली हरियाणा के रोहतक जिले के गांवा रिठाल की मुक्केबाज मंजू रानी ऐसी ही बहन हैं। मंजू पदक के बदले केंद्र सरकार से मिलने वाले सात लाख रुपये विधवा मां और इकलौते छोटे भाई पर न्योछावर करने जा रही हैं। मंजू भरे मन से कहती हैं कि पिता की मृत्यु के बाद मां ने चार बहनों और भाई को बड़ी मुश्किलों में पाला है। अब उनकी बारी है। कैश अवॉर्ड मिलने पर मां को सारी खुशियां दूंगी और भाई को अच्छी तरह से पढ़ाकर उसकी जिंदगी बनाऊंगी।

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रूस से लौटने के बाद मंजू ने 'अमर उजाला' से कहा कि भाई उनसे छोटा है। वह ग्रैज्युएशन के दूसरे साल में है। पैसा नहीं होने के चलते उसकी पढ़ाई में काफी दिक्कत आई है। अब वह भाई को उच्चस्तरीय कोचिंग और अच्छा कोर्स कराकर उसका भविष्य संवारेंगी। अच्छी पढ़ाई करेगा तो उसकी भी जिंदगी बन जाएगी। 

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जगी नौकरी की उम्मीद

मंजू रानी - फोटो : social media
मंजू हरियाणा की जरूर हैं, लेकिन उन्हें राज्य से खेलने के अवसर नहीं मिले तो वह पंजाब चली गईं। बीते वर्ष ही वह राष्ट्रीय स्तर पर सामने आईं, लेकिन उनके पास कोई नौकरी नहीं है। 2010 में पिता की मृत्यु के बाद मां को मिलनी वाली नौ हजार रुपये की पेंशन से परिवार चला है। मंजू कहती हैं कि उन्हें उम्मीद है कि विश्व चैंपियनशिप का यह पदक उन्हें अच्छी नौकरी दिला देगा। वह कहती हैं कि उनके बॉक्सर बनने में मां और कोच सूबे सिंह का बहुत बड़ा योगदान है। मां ने कई बार परिवार चलाने के लिए कर्ज भी लिया, लेकिन कभी इसकी भनक उन्हें नहीं लगने दी। 
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