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वाडा से एनडीटीएल के प्रतिबंधित होने के बड़े कारण का हुआ खुलासा

Tue, 01 Oct 2019 12:04 AM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला

सार

-ए सैंपल में निकले तीन-तीन स्टेरॉयड, बी सैंपल में कुछ नहीं निकला, लैब के इतिहास में पहली बार हुआ
 
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सांकेतिक चित्र
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विस्तार
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वाडा की ओर से नेशनल डोप टेस्ट लैबोरेटरी (एनडीटीएल) को अस्थाई रूप से प्रतिबंधित करने के कारण छन-छन कर बाहर आने लगे हैं। ताजा मामले में एनडीटीएल में एक खिलाड़ी के ए सैंपल को तीन-तीन एनाबॉलिक स्टेरायड के लिए पॉजिटिव घोषित कर दिया गया, लेकिन बी सैंपल की रिपोर्ट में यह खिलाड़ी पाक-साफ निकला। वाडा कोड में सैंपल के गलत आकलन में लैब को अस्थाई रूप से प्रतिबंधित करने का प्रावधान है। वाडा ने लैब को 20 अगस्त को प्रतिबंधित किया है, जबकि वाडा और खिलाड़ी को बी सैंपल के नेगेटिव पाए जाने की सूचना इससे पहले दे दी गई थी।

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दोबारा लिए सैंपल में फिर पॉजिटव 
तेलंगाना के पॉवरलिफ्टर यादवेंदर गौड़ का लखनऊ में नाडा ने 30 सितंबर 2018 को सैंपल (सैंपल लेने के दौरान उसके दो हिस्से ए और बी कर लिए जाते हैं) लिया। जनवरी, 2019 में उसके ए सैंपल को तीन-तीन स्टेरायड के लिए पॉजिटिव घोषित कर अस्थाई प्रतिबंध लगाया गया। इसी दौरान उसने बी सैंपल भी टेस्ट कराया। लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं दी गई। इस दौरान उसे मार्च, 2019 में जांच के लिए नाडा ने बुलाया। यादवेंदर का आरोप है कि नाडा ने उसे बी सैंपल रिपोर्ट नहीं दी, लेकिन उसका एक और सैंपल ले लिया। सात अगस्त 2019 को उसे नाडा ने सूचना दी कि उसका पॉजिटिव पाया गया ए सैंपल बी सैंपल में नेगेटिव निकला है। जिसके चलते उस पर डोप पॉजिटिव होने के लगाए गए आरोप वापस लिए जाते हैं। इसकी सूचना अंतरराष्ट्रीय फेडरेशन के अलावा वाडा को भी दी गई। लेकिन हैरानीजनक तरीके से नाडा ऑफिस में लिए गए सैंपल में उसे एक स्टेरायड के लिए फिर पॉजिटिव घोषित कर दिया गया। उस पर फिर अस्थाई प्रतिबंध लगाया गया है। यादवेंदर का कहना है कि उसे नाडा ऑफिस सैंपल लेने के लिए नहीं बल्कि उसके मामले की जांच के लिए बुलाया गया था, लेकिन यहां उसका सैंपल ले लिया गया।

पहले नेगेटिव निकले सैंपल पाए गए थे पॉजिटिव : वाडा ने जब बीते वर्ष सितंबर माह में एनडीटीएल से 200 के करीब सैंपल कोलोन और मांट्रियाल लैब में टेस्ट कराए थे। तब इसमें से छह सैंपल पॉजिटिव निकले थे। ये सभी सैंपल एनडीटीएल में नेगेटिव निकले थे। 2009 में नाडा की स्थापना के बाद से ऐसा कभी नहीं हुआ है जब एनडीटीएल में कोई ए सैंपल पॉजिटिव पाए जाने के बाद बी सैंपल में नेगेटिव निकला हो। रोम लैबोरेटरी भी 2010 में इस तरह के मामले में फंस चुकी है।

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