बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने विवादास्पद फैसला लेते हुए टॉप 25 बीडब्लूएफ रैंकिंग से बाहर शटलरों की अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलने को की जाने वाली फंडिंग रोक दी है। फेडरेशन के इस फैसले निचली रैंकिंग के शटलरों में विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई है।
राष्ट्रीय चैंपियन सौरभ वर्मा और पी कश्यप समेत 18 शटलरों ने बाई अध्यक्ष हिमंत विश्व सरमा को पत्र लिखकर यह फैसला वापस लेने की गुहार लगाई है, लेकिन फेडरेशन ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।
अमर उजाला के पास मौजूद बाई अध्यक्ष को भेजे गए पत्र के मुताबिक शटलरों ने लिखा है कि फेडरेशन के कोर ग्रुप में होने के बावजूद इस फैसले से शटलर खुद के खर्च पर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने को मजबूर हो गए हैं। इनमें से कईयों के पास प्रायोजक नहीं है और कई बेरोजगार हैं जिसके चलते उन्हें परिवार से पैसे लेकर टूर्नामेंट खेलने पड़ रहे हैं।
ये सभी शटलर गोपीचंद अकादमी में प्रैक्टिस करते हैं और सिंगल्स, डबल्स, मिक्स डबल्स के देश के टॉप शटलरों में शुमार हैं। इन सभी ने बाई अध्यक्ष से कहा है कि कईयों के पास उनके उपकरण के प्रायोजक भी नहीं है। जिससे स्थितियां काफी खराब हो गई हैं।
टॉप 50 शटलरों को की जाती थी फंडिंग
पहले बाई और खेल मंत्रालय की ओर से टॉप 50 शटलरों को फंडिंग की जाती थी, लेकिन हाल ही में इसे टॉप 25 कर दिया गया। सूत्र बताते हैं कि मंत्रालय, साई की ओर से टीम भेजे जाने के दौरान फेडरेशन से कहा जाता था कि गैर जरूरी खिलाडियों का खर्च उनसे नहीं मांगा जाए।
ऐसे में फेडरेशन उन्हें अपने खर्च पर भेजती थी, लेकिन हाल ही में चयन समिति ने टॉप 25 शटलरों का खर्च उठाने का फैसला ले डाला। इस वक्त टॉप 25 में पीवी सिंधु, साइना नेहवाल, के श्रीकांत, समीर वर्मा, बी साई परणनीत, चिराग शेट्टी-सात्विकसाईराज रैंकी रेड्डी जैसे शटलर ही हैं।
बाई के महासचिव अजय सिंघानिया का कहना है कि उन्हें शटलरों का पत्र मिला है। इसका जल्द कोई हल निकाला जाएगा।
हाल ही में सौरभ वर्मा, पी कश्यप, श्लोक रामाचंद्रन, एमआर अर्जुन की जोड़ी, ध्रुव कपिला, जी कृष्णा की जोड़ी अपने खर्च पर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलने गई है।