इसी दौरान दीपिका के कोच धर्मेंद्र तिवारी की उन पर नजर पड़ी। धर्मेंद्र बताते हैं कि उनके कहने पर ही 2016 में कोमालिका को टाटा अकादमी के लिए ट्रायल दिलाया गया। यहां वह चयनित हो गईं। तब से वह उन्हीं के पास हैं। अकादमी ने उन्हें महंगा रीकर्व धनुष दे रखा है। इसी से उन्होंने यह मेडल जीता है। धर्मेंद्र मानते हैं कि कोमालिका के लिए यह मेडल बहुत बड़ा है। अब उसके दिमाग से सीनियर विश्व चैंपियनशिप की विफलता को बोझ हट गया होगा।
पिता चलाते हैं होटल
12वीं की छात्रा कोमालिका पढ़ाई में भी होशियार हैं। उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा 85 प्रतिशत अंकों से पास की हैं। उनके पिता घनश्याम बारू एक छोटा से होटल चलाते हैं जबकि मां आंगनवाड़ी में सेविका हैं। घनश्याम और धर्मेंद्र के मुताबिक कोमालिका हमेशा मुस्कराती रहती है। जिस काम को भी हाथ लगाती है उसे पीछे नहीं छोड़ती है। स्कूल में वह एथलेटिक्स में भी अच्छी थी। अध्यापक ने उसे एथलेटिक्स में आने को कहा, लेकिन मां ने उसे तीरंदाजी में ही बने रहने को कहा।