-जूडो फेडरेशन ऑफ इंडिया ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के चारों जुडोकाओं पर लगाया चार साल का प्रतिबंध
-जूनियर एशियाई चैंपियनशिप के ट्रायल में डोप सैंपल लेने गई थी टीम
नाडा और वाडा की टीम देखकर नामी-गिरामी खिलाडियों के भागने की घटना नई नहीं है, लेकिन यह पहली बार हो रहा है जब डोप सैंपल लेने आई टीम को देखकर भाग रहे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चार जुडोकाओं को चार साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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यह कदम नाडा ने नहीं बल्कि खुद जूडो फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अपने स्तर पर डोप कंट्रोल ऑफिसर (डीसीओ) की रिपोर्ट के आधार पर उठाया है। जेएफआई ने इस कदम की सूचना नाडा से लेकर साई तक को कर दी है।
डीसीओ ने की शिकायत
चीनी ताईपे में 29 जुलाई से होने वाली जूनियर एशियाई चैंपियनशिप केलिए बीते माह भोपाल में ट्रायल आयोजित किए गए थे। इसी ट्रायल के दौरान नाडा की टीम भी डोप सैंपल लेने पहुंची, लेकिन टीम के चयन को फाइनल दौर में पहुंच चुके हरियाणा के दो और पंजाब, दिल्ली का एक-एक जुडोका वहां से भाग लिए और ट्रायल देने ही नहीं आए। डीसीओ ने इसकी रिपोर्ट बनाकर फेडरेशन और नाडा को दी। फेडरेशन ने जांच समिति बनाकर डीसीओ की रिपोर्ट के आधार पर चारों जुडोकाओं को दोषी करार दिया और उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा दिया। इनमें से दो जुडोका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और खेलो इंडिया में भी पदक जीत चुके हैं।
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नाडा की बनती थी कार्रवाई
नियमों के मुताबिक डोप सैंपल नहीं देने या भागने पर डोपिंग अपराध माना जाता है, जिस पर नाडा हियरिंग पैनल के समक्ष सुनवाई होती है। आरोप साबित होने पर ही खिलाड़ी को प्रतिबंधित किया जाता है।
फेडरेशन बोली डोपिंग पर रोक लगाने को जरूरी था कदम
जेएफआई के सेक्रेटरी जनरल मनमोहन जायसवाल का तर्क है कि डोपिंग पर लगाम लगाने को यह कदम उठाना जरूरी था। इस सख्ती से अब खासतौर पर नेशनल कैंप और ट्रायल के दौरान इस तरह की घटनाएं नहीं घटेंगी।