भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवानों को ढाई साल के अंतराल के बाद विदेशी कोच तो मिल गया है, लेकिन तीन दिन पहले भारत आने वाले ईरानी कोच हुसैन करीमी को भारतीय संस्कृति, त्योहारों से अंजान होना भारी पड़ रहा है। सोनीपत के जिस होटल में करीमी को ठहराया गया है वहां उन्हें मांसाहार परोसने से मना कर दिया गया।
इससे परेशान कोच ने ईरानी कुश्ती संघ को लिख दिया कि उन्हें यहां खाने और रहने की समस्या आ रही है। उन्हें मांसाहार नहीं परोसा जा रहा है। यही नहीं उन्होंने यह भी मांग कर दी कि उनकी पत्नी और बेटी वापस ईरान जाना चाहती हैं, उनका टिकट बुक करा दिया जाए। इस पर उन्हें कहा गया कि अनुबंध के मुताबिक कुछ माह बाद ही परिवार को वापस भेजा जा सकता है।
अभी तो वह आए हैं। ईरान ने इस पर भारतीय कुश्ती संघ से पूछताछ कर ली। कुश्ती संघ ने साफ किया है कि नवरात्र के चलते होटल में मांसाहार नहीं परोसा जा सकता है। इसके बाद कोच को खाने की समस्या नहीं आएगी। करीमी का अनुबंध रियो ओलंपिक के बाद से लटका पड़ा था। कई अड़चनों के बाद वह अब साढ़े तीन हजार अमेरिकी डॉलर के वेतन पर यहां आए हैं। वह अपने साथ पत्नी और बेटी को भी लाए हैं। सोनीपत साई सेंटर में उनके लिए क्वार्टर ठीक कराया जा रहा है। उसमें शिफ्ट होने तक उन्हें पास के होटल में ठहराया गया।
कोच ने मांगी छुट्टी : इस माह चीन में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के लिए भारतीय पहलवानों को पहले रूस और बाद में चीन जाना है। यहां ईरानी कोच ने कुश्ती संघ से कहा कि जब टीम बाहर जा रही है तो वह भी छुट्टी पर ईरान चले जाते हैं। इस पर संघ ने साफ किया कि वह ऐसा नहीं कर सकते हैं सीनियर टीम के नहीं रहने पर उन्हें जूनियर पहलवानों पर नजर रखनी होगी।