जकार्ता एशियाई खेलों में खेलने जा रहे गैर मान्यता प्राप्त खेल संघों के खिलाड़ी देश के लिए खुशियां लाने के साथ बुरा सपना भी बन सकते हैं। दरअसल इन खिलाड़ियों का डोप टेस्ट कराए बिना एशियाई खेलों में खिलाने का जोखिम लिया गया है। देश में इनके डोप सैंपल नहीं हुए हैं।
खास बात यह है कि आयोजनकर्ताओं ने भारतीय दल के यहां आते ही रैंडम डोप सैंपलिंग शुरू कर दी है। जिसमें इन खिलाड़ियों के भी कुछ सैंपल लिए गए हैं। अगर कुछ अनहोनी घटती है तो इस जोखिम के बदले देश के हाथ बदनामी के सिवाय कुछ नहीं आना है।
एशियाई खेलों में 570 खिलाड़ियों के भारतीय दल में छह खेलों के 56 खिलाड़ी ऐसे शामिल हैं जिनके खेल संघों को आईओए से मान्यता प्राप्त नहीं है और न ही वह नाडा के टेस्ट ड्रिस्टीब्यूशन प्लान (टीडीपी) में हैं। ब्रिज और सॉफ्ट टेनिस के अलावा कुराशए पेंचाक सिलाट, रोलर स्पोर्ट्स और स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग ऐसे खेले हैं जिनमें डोप की घटनाएं सामने आती रही हैं।
दरअसल नाडा ने इन खिलाड़ियों की देश में इस वजह से सैंपलिंग नहीं की क्योंकि ये टीडीपी में ही शामिल नहीं हैं। नाडा ने पांच सौ के करीब उन खिलाड़ियों के देश और विदेश में सैंपल लिए जो उनके टीडीपी में शामिल हैं।
नाडा ने चेक रिपब्लिक, भूटान और फिनलैंड में एथलीटों के सैंपल कराए हैं, लेकिन इन खिलाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं होने के चलते छोड़ दिया गया। खास बात यह है कि इस बारे में आईओए ने भी कुछ ध्यान नहीं दिया। इनमें से कुछ खेल संघों के पदाधिकारियों ने स्वीकार किया है कि उनके डोप सैंपल नहीं हुए हैं।