इन नियमों के अनुसार, हॉकी में टीम अगर कोविड-19 के कारण भाग नहीं ले पाती हैं तो वे डिस्क्वालिफाई नहीं होंगी बल्कि उन्हें डीएनएस (शुरुआत नहीं कर पाई) चिन्हित किया जाएगा। अगर नॉकआउट चरण में टीम इससे हिस्सा नहीं ले पाती है तो उनकी हासिल की गई न्यूनतम रैंकिंग को सुरक्षित रखा जाएगा और समय के हिसाब को देखते हुए उनकी प्रतिद्वंद्वी अगले दौर में पहुंच जाएगी। हालांकि इन नियमों में फाइनल में पहुंची दोनों टीमों के पॉजिटिव आने की संभावित स्थिति का जिक्र नहीं किया गया है।
मैराथन व पैदल चाल में बिना खिलाड़ी होगी स्पर्धा
ट्रैक एवं फील्ड का कोई एथलीट अगर कोविड-19 जांच में पॉजिटिव आने के कारण प्रतियोगिता के अगले चरण में भाग लेने में विफल रहा तो उसकी जगह पिछले दौर में बाहर होने वाले सर्वश्रेष्ठ प्रतियोगी को मौका मिलेगा। ये नियम हालांकि 10,000 मीटर दौड़, मैराथन और पैदल चाल स्पर्धाओं में लागू नहीं होंगे क्योंकि इसकी एक ही स्पर्धा होती है। इस मामलों में दौड़ का आयोजन वैसे (कोविड-9 संक्रमित) एथलीट के बिना होगा।
निशानेबाजी की मिश्रित स्पर्धा में बदल सकेंगे खिलाड़ी
आईओसी ने प्रतियोगिता से ठीक पहले प्रतिभागी देश के खिलाड़ी के पॉजिटिव पाए जाने पर मिश्रित टीम निशानेबाजी स्पर्धा में वैकल्पिक खिलाड़ी को खिलाने की स्वीकृति दी है। हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धाओं में यह छूट नहीं दी गई है। टोक्यो में 100 देशों के 356 निशानेबाज पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे। सबसे अधिक प्रतिभागी महिला 10 मीटर एयर राइफल और 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में नजर आएंगे। टोक्यो में मिश्रित टीम एयर पिस्टल में सौरभ चौधरी और मनु भाकर की स्टार जोड़ी के अलावा यशस्विनी सिंह देसवाल और अभिषेक वर्मा की जोड़ी पदक के लिए निशाना साधेगी।
मिश्रित टीम एयर राइफल स्पर्धा में देवांश सिंह पंवार और इलावेनिल वलारिवान के साथ दीपक कुमार और अंजुम मौदगिल की जोड़ी चुनौती पेश करेगी। इनमें से कोई निशानेबाज अगर अपनी स्पर्धाओं से पहले घातक वायरस से संक्रमित हो जाता है तो भारतीय दल और अन्य दलों के पास खिलाड़ी को बदलने का विकल्प होगा बशर्ते व्यक्तिगत पिस्टल या राइफल स्पर्धाओं में से उसके पास विकल्प उपलब्ध हो।