भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने देश के एशियाई खेलों में भाग लेने वाले दल से खिलाड़ियों के खेल गांव में ओलंपिक संस्था की 'नीडल मुक्त नीति' का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय महासंघों को दी गयी है कि ताकि देश को फिर शर्मसार नहीं होना पड़े।
राष्ट्रीय खेल महासंघों के अधिकारियों को पत्र लिखकर यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे निश्चित करें कि विशेष बीमारी के लिये दी गयी दवाईयों में प्रतिबंधित पदार्थ मौजूद नहीं हों। उन्हें लाइसेंसधारी डाक्टरों से लिखी दवाईयां ले जाने को कहा गया है जिसकी खिलाड़ियों और अधिकारियों को जरूरत पड़ सकती है।
यह कदम उस घटना को देखते हुए उठाया गया है जब राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान देश को शर्मनाक घटना से रूबरू होना पड़ा था जिसमें दो भारतीय एथलीट -पैदल चालधारी केटी इरफान और त्रिकूद एथलीट वी राकेश बाबू- को इसी नियम के उल्लंघन के कारण स्वदेश भेजना पड़ा था क्योंकि वे अपने कमरों में नीडल की मौजूदगी का ब्यौरा देने में असफल रहे थे।
आईओए महासचिव राजीव मेहता ने पत्र में लिखा, 'दवाईयों को सीलबंद पारदर्शी कवर में ले जाना चाहिए। लाइसेंसधारी डाक्टर की पर्ची होनी चाहिए जिसमें इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि किस बीमारी में यह दवाई और कितनी मात्रा में ली जानी चाहिए।'