पुरुष टीम में अभिषेक और रजत के अलावा दिल्ली केअमन सैनी हैं, जबकि महिला टीम में ज्योति के अलावा झारंखड की मधुमिता और मध्य प्रदेश की मुस्कान किरार हैं। जबलपुर की मुस्कान अभी 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। उनका कैरियर अभी शुरू हो रहा है, लेकिन बाकी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
चार साल की उम्र में कृष्णा नदी को पार करने का कारनामा करने वाली ज्योति खुलासा करती हैं कि बीते वर्ष अर्जुन अवार्डी बनने के बाद आंध्र सरकार ने उन्हें नौकरी और एक करोड़ की राशि देने की घोषणा की थी, लेकिन घोषणाएं सरकारी फाइलों में दफ्न हैं। वहीं रजत कहते हैं कि उनकी सफलता को नई स्पोर्ट्स पॉलिसी ने ही दफ्ना दिया। नई पॉलिसी में 2016 के बाद एशियाई खेलों और ओलंपिक में पदक जीतने वाले को नौकरी दी जाएगी। उनकी पुरानी घोषणा भुला दी गई।
रजत दुख से कहते हैं कि वह तो अपना काम कर रहे हैं लेकिन सरकारों को भी अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलनी चाहिए। अभिषेक के मुताबिक उन्हें प्रमोशन के लिए हर बार डीओपीटी के नियमों का हवाला देकर चुप कर दिया जाता है। अब उन्होंने भी सरकारी तंत्र को अपने तीर से जवाब देने का निश्चय कर लिया है। तीरंदाज कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि यहां आया पदक उन्हें नौकरियां दिला देगा।