भारतीय स्टार मुक्केबाज विजेंदर सिंह का पेशेवर सर्किट में सफर अब तक शानदार रहा है और डेढ़ साल बाद रिंग में उतरकर लगातार 11वीं पेशेवर जीत से वह थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। पेशेवर सर्किट में इतनी सफलता के बाद ओलंपिक खेलने के बारे में अब भी उन्होंने मन नहीं बदला है और इस मिडिलवेट मुक्केबाज का कहना है, ‘अगर दोबारा देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है तो जरूर जाऊंगा।
फिल्मों, राजनीति और टीवी शो की एंकरिंग में हाथ आजमाने वाले विजेंदर का कहना है कि भले ही वह किसी अन्य क्षेत्र में काम करते रहें लेकिन मुक्केबाजी से वह कभी दूर नहीं होने वाले। ओलंपिक में फिर से देश का प्रतिनिधित्व करने के संबंध में विजेंदर ने यहां एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘देखिये अभी मेरे प्रायोजक टॉप रैंक के साथ अभी दो मुकाबले बचे हैं और अभी मेरा ध्यान इन्हीं पर लगा है। ओलंपिक के दौरान परिस्थतियां कैसी होती हैं, मैं अभी से कुछ नहीं कह सकता, अगर दोबारा मौका मिलता है तो जरूर जाऊंगा।’
पूर्व डब्ल्यूबीओ एशिया पैसिफिक चैंपियन विजेंदर सिंह ने नेवार्क में अमेरिकी पेशेवर सर्किट में पदार्पण करते हुए अपने से कहीं ज्यादा अनुभवी माइक स्नाइडर को तकनीकी नॉकआउट से पराजित किया जो उनकी आठवीं नॉकआउट जीत थी। ‘हाल ऑफ फेम’ बॉब अरूम के टॉम रैंक प्रमोशंस से करार कर चुके विजेंदर फिलहाल अब अगले दो मुकाबलों पर ध्यान लगा रहे हैं।
विजेंदर ने कहा, ‘अमेरिका में इस पदार्पण मुकाबले में प्रतिद्वंद्वी के बारे में इतना ज्यादा नहीं पता था और उन्होंने पहले दौर में मुक्का जड़ा तो मैं सन्न रह गया। इसके बाद मैंने खुद को कहा कि ऐसे नहीं होगा। फिर मैंने चार राउंड में नॉकआउट कर दिया।’ यह पूछने पर पेशेवर और अमेचर में कितना फर्क है, दबाव कैसा रहता है तो इस पर विजेंदर ने कहा, ‘मैं सीधा स्पष्ट जवाब नहीं दे सकता। दोनों की अपनी महत्ता है और दबाव दोनों में ही होता है। मैं इसका घुमाकर ही जवाब दूंगा।’
अमेरिका में पदार्पण के बारे में उन्होंने कहा, ‘डेढ़ साल बाद वापसी कर रहा था, मैं शत प्रतिशत देना चाहता था। पहला जोरदार घूंसा खाने के बाद मैंने सोचा कि अब दूर रहकर ही खेलूंगा और इससे सफलता मिली। मैं खुश हूं।’
वर्ष 2020 में विश्व खिताब के लक्ष्य के बारे में हरियाणा के 33 साल के मुक्केबाज का कहना है कि उनकी निगाहें इस 11-0 के रेकॉर्ड में नंबर को बढ़ाने की है और शून्य को बरकरार रखने की है। विजेंदर ने अपने आईओएस प्रायोजक नीरव तोमर की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘अभी मेरा रेकॉर्ड 11-0 है और मैं सिर्फ नंबर बढ़ाने पर ध्यान लगाए हूं जिसमें शून्य में कोई नंबर नहीं आने देना चाहता। मेरे अभी दो मुकाबले हैं।'
उन्होंने कहा, 'टॉप रैंक और आईओएस ने मेरे लिए खाका तैयार किया है। अभी आगे आने वाली फाइट कठिन ही होती जाएगी जिसमें अंतरराष्ट्रीय और इंटरकॉन्टिनेंटल खिताब दाव पर लगे होंगे। अगर सब ठीक रहा तो 2020 में विश्व खिताब का मौका मिल सकता है।’