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एशियाई पैरा खेलों में तिरंगा ऊंचा रखने को बेताब पैरा एथलीट, 13 अक्टूबर से होगा आगाज

Sun, 30 Sep 2018 07:36 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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asian para games
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एशियाई पैरा खेल इंडोनेशिया के जकार्ता में छह से 13 अक्तूबर तक आयोजित किए जाएंगे। शताब्दी अवस्थी का बचपन में सपना था कि वह सेना में नौकरी करेंगी, लेकिन 2006 में एक दुर्घटना के बाद वह व्हीलचेयर तक ही सीमित रह गईं। शताब्दी ने कहा, 'मैं कभी खेलों में रूचि नहीं रखती थी, मैं हमेशा पढ़ाई पर ही ध्यान लगाती रहती थी कि मुझे नौकरी मिल जाये। मैंने बैंक की परीक्षा दी और फिर स्टेट बैंक आफ इंडिया में मुझे नौकरी मिल गई।'

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वह 2012 में 'कौन बनेगा करोड़पति' में पहुंची। उन्होंने कहा, '2012 में मुझे केबीसी के लिए चुना गया जिसमें मैंने 50 लाख जीते। इसके बाद मैंने समाज सेवा शुरू की। खेल की बात कभी भी मेरे दिमाग में नहीं आयी। मैं अखबार में सुंदर गुर्जर के बारे में पढ़ती थी। मुझे उनसे प्रेरणा मिली और फिर मैं अपने कोच से मिली, जिन्होंने मुझे प्रेरित किया।'

उन्होंने कहा, 'एक बार मैंने शाट पुट खेलना शुरू कर दिया तो मैं हर समय सिर्फ खेलने का ही सपना देखती थी, चाहे मैं खेल रही होती या फिर सो रही होती। मैं खेलना नहीं छोड़ सकती।' शताब्दी पिछले साल भाला फेंक और शाट पुट स्पर्धा में भी भाग ले रही हैं और इस दौरान उन्होंने दो अंतरराष्ट्रीय पदक भी जीते हैं।
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शताब्दी के प्रेरक सुंदर की जिंदगी भी बदल गई और जयपुर के भाला फेंक स्पर्धा का यह विश्व रिकार्डधारी हमेशा जानता था कि खेल ही उनकी जिंदगी होगी। उन्होंने कहा, 'मैं जानता था कि मैं शुरू से ही खेलों में जाना चाहता था। मेरे पिता पहलवान थे। मैं कभी भी पढ़ाई में रूचि नहीं रखता था, यहां तक कि मैं दसवीं कक्षा में भी फेल हो गया।'
 

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sundar gurjar
सुंदर पहले सक्षम वर्ग में खेलते थे लेकिन 2015 में एक दुर्घटना में उनका बायां हाथ कलाई से कट गया, जिसके बाद उन्होंने पैरा एथलेटिक्स (एफ-46 भाला फेंक और चक्का फेंक) में खेलना शुरू किया। सुंदर 2016 रियो पैरालंपिक में भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने के प्रबल दावेदार थे लेकिन जिस दिन स्पर्धा थी, उस दिन अजीब से गफलत हुई और वह टूर्नामेंट स्थल पर नहीं पहुंच सके और डिस्क्वालीफाई हो गये।

अब एशियाई खेलों में दावेदारी के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, 'मैं रियो में पदक का दावेदार था, देखो वहां क्या हुआ। लेकिन इस बार देखते हैं, तैयारी अच्छी हैं और मुझे भगवान पर भरोसा है। मैं बस भारत के लिए जीतना चाहता हूं।' इस साल के शुरू में सुंदर ने हमवतन देवेंद्र झझारिया का 2016 रियो में बनाया गया विश्व रिकार्ड तोड़ा और पेरिस व बर्लिन में हुई विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीता। अर्जुन पुरस्कार हासिल कर चुके स्प्रिंटर संदीप मान ने 2014 इंचियोन खेलों में 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में दो रजत जबकि 2010 ग्वांग्झू खेलों में एक रजत जीता।

संदीप 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में खेलते हैं। उनका बायां हाथ बचपन से ही निष्क्रिय है। उन्होंने कहा, 'मैं स्कूल के दिनों से ही अच्छा दौड़ता था। मैं फर्राटा स्पर्धाओं में भाग लिया करता था। मैंने एक दिन देवेंद्र झझारिया की इंटरव्यू देखा और फिर उनसे मिला भी। तब से वे मेरा समर्थ करते हैं जो उनके आदर्श भी हैं और उन्हीं की तरह उपलब्धियां हासिल करना चाहते हैं। मैंने पहले ही उनकी तरह अर्जुन पुरस्कार और एशियाई पदक जीत लिया है। अब उनके पास खेल रत्न है और मैं भी यही चाहता हूं। जब तक मुझे यह नहीं मिलता, मैं रूकूंगा नहीं।'
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