खेल मंत्रालय की ओर से प्रतिबंधित जिम्नास्टिक फेडरेशन ऑफ इंडिया और साई के बीच चल रहे विवाद में जिम्नास्ट पिस गए हैं। 22 नवंबर से जर्मनी के कोटबस में होने वाले ओलंपिक क्वालिफाइंग विश्व कप में अब तक टीम की भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पाई है। टीम की रवानगी के लिए अब तक न तो हवाई यात्रा के टिकट बुक हुए हैं और न ही होटल की बुकिंग कराई गई है।
खास बात यह है कि विश्व कप के लिए साई की ओर से अब तक आधिकारिक मंजूरी प्रदान नहीं की गई है। इसका कारण है खेल मंत्रालय की ओर से निकाला गया वह आदेश जिसमें साफ किया गया है कि प्रतिबंधित खेल संघ के खिलाड़ी देश के नाम और झंडे का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कंपटीशन में नहीं कर सकेंगे।
प्रतिबंधित जीएफआई ने जहां साफ कर दिया है कि बिना देश के झंडे तले उनकी ओर से टीम नहीं खिलाई जाएगी। वहीं साई इस विवाद से निपटने के लिए मंत्रालय से अपील करने जा रही है कि इस विश्व कप के लिए देश के झंडे तले खेले जाने की अनुमति प्रदान कर दी जाए।
विश्व कप के लिए जीएफआई ने दीपा कर्माकर, आशीष कुमार, अरुणा रेड्डी, राकेश पात्रा, योगेश्वर सिंह और परिणीति नायक का चयन किया है, लेकिन साई ने योगेश्वर और परिणीति को मंजूरी नहीं दी है। परिणीति ने गुरुवार को इसके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए साई को लिखा है कि उन्हें खेलने की मंजूरी दी जाए। वरना इसके खिलाफ वह ठोस कदम उठाएंगी।
दीपा कर रहीं अकेले ट्रेनिंग
विश्व कप के लिए सभी जिम्नास्ट अलग-अलग ट्रेनिंग कर रहे हैं। आशीष और अरुणा टॉप्स के तहत पोलैंड में ट्रेनिंग कर रहे हैं जबकि दीपा अकेले आईजी स्टेडियम में बिश्वेशर नंदी के संरक्षण में तैयारियां कर रही हैं। नंदी का कहना है कि वर्तमान में जिस तरह की स्थितियां उससे जिम्नास्टों का नुकसान हो रहा है। ओलंपिक क्वालिफाइंग के लिए जिम्नास्टों की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं।