मेरठ केअमरीश के मुताबिक अविनाश सेना की घातक टीम में थे। इस टीम का काम आतंकवादियों और देशद्रोहियों से लोहा लेना होता है। 2012 में उन्होंने सेना में ही अविनाश को ढूंढा था। वह सिक्किम में तैनात थे। हैदराबाद में अपनी यूनिट से क्रास कंट्री दौडने आए थे। उन्होंने अविनाश की मांसपेशियां देखकर कहा कि एथलेटिक्स करोगे तो वह तुरंत तैयार हो गए।
इसके पीछे कारण यह था कि सिक्किम में जिस जगह वह तैनात थे वहां जोंक बहुत थीं और उन्हें चिपक जाती थीं। अमरीश कहते हैं कि सेना में एक बात सिखाई जाती है। मरते दम तक लडना है। फिर अविनाश तो घातक टीम में था। यही बात उसने दिमाग में रखी और दो बार गिरने के बावजूद रेस पूरी की। वरना गिरने के बाद अमूमन एथलीट रेस छोड़ दिया करते हैं।