अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आईएएएफ) के अध्यक्ष सेबास्टियन को ने आज कहा कि वह भारतीय धाविका दुती चंद की ‘लिंग विवाद’ से हो रही पीड़ा को समझ सकते है लेकिन उन्हें हर खिलाड़ी के लिये ‘बराबरी’ का माहौल बनाना है।स्विट्जरलैंड के लुसाने में स्थित अंतर्राष्ट्र्रीय खेल पंचाट (सीएएस) में आईएएएफ की हायपरएंड्रोजीनिज्म नीति के खिलाफ दुती की इस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर संभवत: अगले महीने सुनवायी करेगा। इस नीति के तहत महिला खिलाड़ियों में टेस्टास्टरोन की मात्रा अधिक होने पर उन्हें प्रतिस्पर्धा में भाग नहीं लेने दिया जाता है।
भारत में इस मामले की गंभीरता और विभिन्न संगठनों से दुती को मिल रही समर्थन के बारे में पूछे जाने पर को ने कहा, ‘‘मैं इसे समझ सकता हूं, हम इंसान है।’’ इस मुद्दे पर अगले महीने खेल पंचाट का फैसला आने के बाद इसके स्थायी समधान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘ मुझे लगता है इस पर सीएएस को ही फैसला लेना है। यह खेल पंचाट है। अंतर्राष्ट्रीय संघ के तौर पर हमें हर किसी के लिये बराबरी का माहौल तैयार करना है और हमें ऐसा ढांचा और समझ विकसित करना है जहां हर किसी को इसकी जानकारी हो।’’ उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस मुद्दे पर सीएएस का फैसला आने के बाद मामला सुलझ जायेगा।
दुती को भारतीय एथलेटिक्स संघ ने 2014 में हायपरएंड्रोजीनिज्म नीति के तहत किसी स्पर्धा में भाग लेने से रोक दिया था। रोक लगाने के बाद उन्होंने इस फैसले को सीएएस में चुनौती दी थी जिसके बाद जुलाई 2015 में सीएएस ने दो वर्षों के लिये हायपरएंड्रोजीनिज्म नीति को टाल दिया था। दो वर्ष पूरा होने के बाद आईएएएफ ने इस मामले में फिर से सीएएस का दरवाजा खटखटाया है।
को ने उम्मीद जतायी की जल्द ही भारत में एक दिवसीय एथलेटिक्स खेलों का आयोजन हो सकता है। हालांकि उन्होंने किसी स्पर्धा का नाम नहीं बताया। उन्होंने कहा, ‘‘ अगर भारत में अच्छे खेलों का आयोजन होगा तो ज्यादा से ज्यादा युवा खिलाड़ी एथलेटिक्स से जुड़ेगे। मुझे याद है 2010 राष्ट्रमंडल खेल के दौरान स्टेडियम में दर्शक भरे रहते थे।’’ उन्होंने कहा कि पिछले माह ओड़िशा में हुये एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दौरान भी स्टेडियम में काफी संख्या में दर्शक मौजूद थे।’’