आखिर हरसिमरन कौर ने अपने पिता के अधूरे सपने को पूरा करने की आधारशिला रखी ही दी। 16 साल पहले कपूरथला में राष्ट्रीय बास्केटबाल खिलाड़ी सुखदेव सिंह और अंतरराष्ट्रीय वॉलीबाल खिलाड़ी सुमनप्रीत कौर को हरसिमरन के रूप में बेटी हुई तो ज्यादातर ने मुंह और भौं सिकोड़ते हुए कहा लड़का होता तो अच्छा रहता।
पिता को बास्केटबाल कोर्ट पर पसीना बहाते देख चार साल पहले हरसिमरन खुद कोर्ट पर उतर पड़ीं। आज यही हरसिमरन भारतीय टीम का प्रतिनिधत्व करने के बाद एनबीए की ओर से उनकी ऑस्ट्रेलिया स्थित ग्लोबल अकादमी के कैंप के लिए चुन ली गई हैं। वह दुनिया भर से चुनी गईं खिलाडियों के बीच वहां सात से 24 नवंबर तक तैयारियां करेंगी। जिससे निकट भविष्य में उनका डब्लूएनबीए के लिए रास्ता खुल सकता है।
छह फुट दो इंच लंबी हरसिमरन अपनी खुशी को बयां नहीं कर पा रही हैं। वह मानती हैं कि यह उनके लिए अपने पिता के सपने को पूरा करने का बहुत बड़ा अवसर है। हरसिमरन खुलासा करती हैं कि उनके पिता पंजाब और रेलवे के लिए खेलते थे। वह भारतीय टीम में चुने जाने के मुहाने पर थे, लेकिन उनके घुटने में एसीएल इंजुरी हो गई। यह आपरेशन महंगा था और उनके पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह इसे करवा पाते। उन्होंने अपना बास्केटबाल करियर कुर्बान कर दिया और मां ने नौकरी के लिए वॉलीबाल छोड़ दी।
पिता ने इसके बाद कपूरथला में बास्केटबाल सिखाना शुरू कर दिया। एक दिन वह कोर्ट में पहुंची और बोलीं वह भी यह खेल खेलेंगी। पिता ने कहा कि अगर बास्केटबाल खेलना चाहती हैं तो उन्हें इसकी ऊंचाईयां छूनी होंगी। तब से उनका कोर्ट पर एक पर एक मुकाबला होता है। आज भी वह पिता के साथ खेलती हैं लेकिन वह हार नहीं मानते हैं। हरसिमरन की तरह उनकी छोटी बहन भी बास्केटबाल खेलती है, जबकि उनके दादा जी कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे।
हेमंत रस्तोगी